चुनाव आते ही मौलाना तौकीर रजा की बढ़ी सियासी अहमियत:अजय राय के बाद अब AIMIM को भी आई याद, फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना को बताया निर्दोष
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी दलों के समीकरण और बयानबाजी तेज हो गई है। बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुए बवाल और उपद्रव के आरोपी इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा पिछले करीब एक साल से फतेहगढ़ जेल में बंद हैं। देश के सबसे बड़े सुन्नी मरकज दरगाह आला हजरत खानदान से ताल्लुक रखने वाले मौलाना तौकीर रजा के सियासी रसूख को देखते हुए अब राजनीतिक दलों में उनके लिए हमदर्दी जताने की होड़ मच गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बरेली दौरे के बाद अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को भी मौलाना तौकीर रजा की याद सताने लगी है और पार्टी अब खुलकर उन्हें बेकसूर और निर्दोष करार दे रही है। अजय राय के दौरे पर सवाल, लेकिन खुद भी मौलाना के पक्ष में उतरी AIMIM
AIMIM के प्रदेश महासचिव नदीम कुरैशी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के मौलाना तौकीर रजा के आवास पर पहुंचने को विशुद्ध 'चुनावी स्टंट' करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और अजय राय को पूरे एक साल बाद मौलाना की याद आई है, क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव सिर पर है। नदीम कुरैशी ने सवाल उठाया कि जब पिछले एक साल में लोग जेलों में थे और परिवारों पर फाके की नौबत थी, तब कांग्रेस का कोई नेता हाल जानने क्यों नहीं पहुंचा? हालांकि, अजय राय पर निशाना साधते-साधते खुद AIMIM भी उसी चुनावी डगर पर नजर आई और मौलाना तौकीर रजा को बेकसूर ठहराते हुए पूरी घटना से उनका पल्ला झाड़ती दिखी। 'मौलाना मौके पर नहीं थे, असली जिम्मेदार पर्दे के पीछे': AIMIM
बरेली बवाल के मामले में नदीम कुरैशी ने मौलाना तौकीर रजा का सीधा बचाव करते हुए कहा कि वह मौलाना को इस घटना का जिम्मेदार नहीं मानते। उन्होंने दलील दी कि मौलाना ने भीड़ जुटाने का आह्वान जरूर किया था, लेकिन वे खुद घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। नदीम कुरैशी के मुताबिक, बरेली में शांति बिगाड़ने वाले असली साजिशकर्ता पर्दे के पीछे हैं, जिन्हें पुलिस को बेनकाब करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने जेल में बंद लोगों और नाबालिगों का पक्ष लेते हुए कहा कि वे बेकसूर हैं और अदालत से उन्हें राहत मिल रही है। IMC छोड़ने और 2027 चुनाव पर रुख
इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) छोड़ने के सवाल पर नदीम कुरैशी ने स्पष्ट किया कि उन्हें मौलाना तौकीर रजा से कोई निजी शिकायत नहीं थी, लेकिन संगठन के भीतर कुछ लोगों का आचरण ठीक नहीं था और वहां घुटन महसूस होने के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ी थी। उन्होंने दावा किया कि बरेली में अब IMC का वजूद खत्म हो चुका है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM प्रदेश की करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने गठबंधन को लेकर विपक्षी दलों को 2 अक्टूबर तक का समय दिया है, यदि कोई गठबंधन नहीं बनता है, तो AIMIM तीसरा मोर्चा बनाकर मजबूती से चुनावी मैदान में उतरेगी। आला हजरत परिवार का रसूख और 2027 के मुस्लिम वोट बैंक की रस्साकशी
सियासी जानकारों का मानना है कि मौलाना तौकीर रजा बरेलवी मसलक के सबसे बड़े केंद्र दरगाह आला हजरत से जुड़े हैं, जिसका असर न सिर्फ रुहेलखंड बल्कि पूरे प्रदेश के मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ता है। 26 सितंबर 2025 की घटना के बाद एक साल तक मौलाना फतेहगढ़ जेल में बंद रहे, लेकिन जैसे ही विधानसभा चुनाव का बिगुल करीब आया, कांग्रेस के अजय राय से लेकर AIMIM तक उनके घर और परिवार की परिक्रमा करने लगे हैं। मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की इस जंग में कोई भी पार्टी आला हजरत परिवार की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती, यही वजह है कि पहले चुप्पी साधने वाली पार्टियां भी अब मौलाना की पैरवी में आगे आ रही हैं।
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