सर्दियों से पहले प्रदूषण पर बड़ा प्रहार

दिल्ली सरकार ने सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना जारी की है। नई व्यवस्था के तहत प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र के बिना वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा और निर्माण गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

सर्दियों से पहले प्रदूषण पर बड़ा प्रहार

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जून 2026

सर्दियों से पहले सरकार की बड़ी तैयारी

दिल्ली सरकार ने आगामी सर्दियों में वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने एक नई कार्ययोजना अधिसूचित की है, जिसके तहत नवंबर से फरवरी तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम लागू किए जाएंगे।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार इस बार प्रदूषण बढ़ने का इंतजार नहीं करेगी, बल्कि पहले से ही आवश्यक व्यवस्थाएं लागू कर लोगों और संस्थानों को तैयारी का पर्याप्त समय देगी।

बिना प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा ईंधन

नई व्यवस्था के अनुसार राजधानी के सभी ईंधन केंद्रों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा जिनके पास वैध प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र होगा। सरकार का मानना है कि इससे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।अधिकारियों के अनुसार यह कदम वाहन जनित प्रदूषण को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

बाहरी राज्यों के पुराने व्यावसायिक वाहनों पर रोक

सरकार ने एक नवंबर से इकतीस जनवरी तक राजधानी के बाहर पंजीकृत गैर उन्नत उत्सर्जन मानक वाले व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।हालांकि संपीड़ित प्राकृतिक गैस, विद्युत चालित वाहनों, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों में लगे वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी।

पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

सर्दियों के दौरान निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के उद्देश्य से अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने का फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था एक नवंबर से अट्ठाईस फरवरी तक प्रभावी रहेगी।सरकार का मानना है कि इससे लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे और सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी।

कार्यालयों में सीमित उपस्थिति की व्यवस्था

यदि प्रदूषण का स्तर अत्यधिक गंभीर हो जाता है तो सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम पचास प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकेगी।शेष कर्मचारियों के लिए घर से कार्य करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। इसका उद्देश्य यातायात का दबाव कम करना और वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है।

निर्माण कार्यों पर सख्त निगरानी

सरकार ने निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों के लिए भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एक नवंबर से इकतीस जनवरी तक सभी परियोजनाओं को धूल नियंत्रण संबंधी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।यदि दस दिसंबर से बीस जनवरी के बीच प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ता है तो अतिरिक्त प्रतिबंध भी लागू किए जा सकते हैं।

धूल नियंत्रण उपकरण होंगे अनिवार्य

बड़े निर्माण स्थलों और ऊंची व्यावसायिक इमारतों पर धूल नियंत्रण के विशेष उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत जल फुहार प्रणाली, धूल दमन उपकरण और अन्य नियंत्रण उपायों का उपयोग करना होगा।सरकार का लक्ष्य निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक लाना है।

खुले में कचरा जलाने पर सख्ती

खुले स्थानों पर कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री जलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए आवासीय कल्याण समितियों, संस्थानों और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मानवरहित उड़न यंत्रों और क्षेत्रीय निरीक्षण तंत्र का उपयोग भी बढ़ाया जाएगा।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के साथ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।अधिकारियों का कहना है कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएंगे।

जनभागीदारी को बताया जरूरी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार के प्रयासों से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए नागरिकों, उद्योगों, संस्थानों और आवासीय संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।उन्होंने कहा कि समय से पहले जानकारी देने का उद्देश्य लोगों को तैयार करना और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार की यह सर्दी कार्ययोजना प्रत्येक वर्ष एक नवंबर से अट्ठाईस फरवरी तक लागू रहेगी और प्रदूषण नियंत्रण की अन्य व्यवस्थाओं के साथ समानांतर रूप से प्रभावी रहेगी।