देशभर में कथाओं से पहले होगा वंदेमातरम:काशी में संतों ने प्रस्ताव किया पारित,बालक देवाचार्य बोले-राम कथा में सभी धर्म का होगा प्रवेश
वाराणसी में अखिल भारतीय व्यास संघ के राष्ट्रीय अधिवेशन में धर्मांतरण, हिंदू धर्मग्रंथों और देवी-देवताओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी, युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने और राष्ट्रभाव जागृत करने सहित कई प्रस्ताव पारित किए गए।काशी के प्राचीन पातालपुरी मठ में आयोजित अधिवेशन का शुभारंभ व्यास संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अधिवेशन में धर्मांतरण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने चिंता जताई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि संगठित तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है और इसे रोकने के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। इस पर सर्वसम्मति से धर्मांतरण के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। संघ की ओर से गांव स्तर पर समितियां गठित कर देशभर में जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई। धर्मग्रंथों के अपमान के खिलाफ प्रस्ताव जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म और धर्मग्रंथों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यास अपनी कथाओं के माध्यम से लोगों को ऐसे मामलों के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए संत समाज को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इस संबंध में अखाड़ों से बातचीत चलने की बात भी उन्होंने कही। कथाओं में गूंजेगा वंदे मातरम् अधिवेशन में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि धार्मिक कथाओं की शुरुआत में अब वंदे मातरम् का गायन किया जाए। इसके साथ ही कथाओं में स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के जीवन और उनके संघर्ष की चर्चा करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। महंत जगदीश्वर दास ने कहा कि लोगों को देश की आजादी की कीमत और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान की जानकारी मिलनी चाहिए। धर्म के साथ देश की चिंता करना भी जरूरी है। जेन-जी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने पर जोर जगतगुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कथावाचकों की जिम्मेदारी केवल कथा सुनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना भी है। उन्होंने जेन-जी को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभाव से जोड़ने की नीति को लागू करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति को रामभक्ति और भारतीय संस्कृति की ओर ले जाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। रामकथा में मुस्लिम समाज को प्रवेश की कहीं बात रामपंथ के पंथाचार्य डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने प्रस्ताव रखा कि रामकथाओं में किसी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने उन लोगों को भी जोड़ने की बात कही, जिनके पूर्वजों ने वर्षों पहले धर्म परिवर्तन किया था। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी संवाद और भाईचारे को बढ़ाने के लिए हिंदू और मुस्लिम समाज को एक परिवार की तरह जागरूक करने का प्रयास किया जा सकता है।
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