डेटा-सेंटर के लिए अडानी को अलग बिजली लाइसेंस:UPERC में उपभोक्ता परिषद ने दर्ज कराया विरोध, 16 को सुनवाई

Oct 13, 2026 - 19:17
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डेटा-सेंटर के लिए अडानी को अलग बिजली लाइसेंस:UPERC में उपभोक्ता परिषद ने दर्ज कराया विरोध, 16 को सुनवाई
नोएडा में डेटा सेंटर पार्क के लिए अडानी समूह को अलग बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पर कानूनी आपत्तियां दाखिल करते हुए सवाल उठाया है कि जब मौजूदा बिजली वितरण कंपनी के नेटवर्क से आपूर्ति की संभावना है, तो अलग लाइसेंस की जरूरत क्यों है? परिषद ने मांग की है कि लाइसेंस देने से पहले तकनीकी क्षमता, कानूनी पात्रता और आम उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक असर की जांच की जाए। मामला नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डेटा सेंटर पार्क का है। यहां बिजली वितरण के लिए Adani Energy Solutions Step Eleven Limited ने अलग लाइसेंस मांगा है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में याचिका संख्या 2333/2025 के तहत चल रहे इस मामले में 16 अक्टूबर को जनसुनवाई होगी। पहले जांचें PVVNL की क्षमता, फिर अलग लाइसेंस पर फैसला उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि डेटा सेंटर को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर मौजूदा वितरण व्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग को यह जांचना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के नेटवर्क की क्षमता कितनी है। डेटा सेंटर की बिजली मांग पूरी करने के लिए कितने अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी और क्या मौजूदा लाइसेंसधारी के जरिए ही आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था संभव है। वर्मा के मुताबिक, अलग वितरण लाइसेंस की मांग करने भर से किसी कंपनी को लाइसेंस पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत आवेदक की पात्रता और प्रस्तावित व्यवस्था की वास्तविक जरूरत का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए। आम उपभोक्ताओं पर न पड़े अतिरिक्त बोझ परिषद ने अपनी आपत्तियों में आवेदक की स्वतंत्र वित्तीय क्षमता, तकनीकी दक्षता, वितरण नेटवर्क पर वैध अधिकार और नियामकीय नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की है। साथ ही PVVNL के मौजूदा नेटवर्क, निवेश, राजस्व जरूरत और बिजली खरीद व्यवस्था पर अलग लाइसेंस के संभावित प्रभाव का आकलन करने को कहा है। अवधेश वर्मा ने कहा कि किसी एक बड़े उपभोक्ता या परियोजना के लिए तैयार की जाने वाली व्यवस्था की लागत का अनुचित बोझ घरेलू और अन्य सामान्य बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की डेटा सेंटर नीति विद्युत अधिनियम और नियामकीय शर्तों के पालन का विकल्प नहीं हो सकती। लाइसेंस मिला तो लगें उपभोक्ता हितों की शर्तें उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की है कि 16 अक्टूबर की जनसुनवाई में सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही फैसला लिया जाए। परिषद का कहना है कि जब तक अलग लाइसेंस की जरूरत, आवेदक की पात्रता और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक लाइसेंस देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि आयोग लाइसेंस देने का फैसला करता है, तो आपूर्ति की गुणवत्ता, शिकायतों के निस्तारण, लागत की पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट शर्तें तय की जाएं।

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