देवबंद में सम्मेलन की अनुमति नहीं मिली:राष्ट्रीय नवनिर्माण दल हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार पर राजनीतिक भेदभाव का आरोप लगाया
सहारनपुर के देवबंद में कार्यकर्ता सम्मेलन की अनुमति नहीं मिलने पर राष्ट्रीय नवनिर्माण दल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। पार्टी ने 30 सितंबर 2026 को जारी प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी है। पार्टी ने 4 अक्टूबर को करीब 2,000 कार्यकर्ताओं का सम्मेलन आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी। याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस की रिपोर्ट में बैठक के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं था, फिर भी प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। दल ने इसे राजनीतिक भेदभाव बताते हुए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया है। पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दाखिल की है। दूसरे संगठनों के कार्यक्रमों का दिया हवाला याचिका के मुताबिक, पार्टी ने 23 सितंबर को सम्मेलन की अनुमति मांगी थी। देवबंद पुलिस ने 27 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में बैठक के खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं दिया था। रिपोर्ट में जातिगत या धार्मिक हिंसा की आशंका भी नहीं जताई गई थी। इसके बावजूद प्रशासन ने आदर्श आचार संहिता और संभावित हिंसा का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। दल ने याचिका में भाजपा के 22 सितंबर और 1 अक्टूबर को निकाले गए जुलूसों का उल्लेख किया है। इसके अलावा 4 अक्टूबर को मेरठ में समाजवादी पार्टी की बैठक, मुजफ्फरनगर में जाट महासभा की सभा और सहारनपुर में यूजीसी से जुड़े विरोध प्रदर्शन का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि दूसरे संगठनों को कार्यक्रम करने का अवसर मिला, लेकिन उसके सम्मेलन पर रोक क्यों लगाई गई। अध्यक्ष बोले- सरकार विरोध से घबराई हुई राष्ट्रीय नवनिर्माण दल के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष रीकांत त्यागी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनता के विरोध से घबराई हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रशासन और नौकरशाही का इस्तेमाल भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह कर रही है। त्यागी ने दावा किया कि विपक्षी दलों और नेताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि सरकार को आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होने का डर है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा 100 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी। यह उनका राजनीतिक दावा है।
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