देवरिया में रास्ते पर कब्जे का आरोप:विधायक-सांसद पर उठाए सवाल, बोलीं- 113 साल की दादी के लिए दरवाजे तक नहीं पहुंचती एंबुलेंस
देवरिया के सकरापार मोहल्ले की रहने वाली नेहा पांडे ने घर तक आने-जाने का रास्ता बाधित होने का आरोप लगाते हुए वीडियो जारी किया है। उनका कहना है कि रास्ते पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे उन्हें करीब तीन फुट ऊंची दीवार पार करके घर से बाहर निकलना पड़ता है। महिला का आरोप है कि कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। नेहा ने वीडियो में अपनी 113 साल की दादी की परेशानी का जिक्र करते हुए कहा कि रास्ता बंद होने के कारण एंबुलेंस उनके दरवाजे तक नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी और सांसद शशांक मणि त्रिपाठी से मदद की गुहार लगाई है। महिला की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नेहा पांडे के मुताबिक, गांव के कुछ लोगों ने उनके घर तक आने-जाने वाले रास्ते पर कब्जा कर लिया है। इसके चलते उन्हें करीब तीन फुट की दीवार पार करके आना-जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि रास्ते की समस्या को लेकर वह लंबे समय से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत कर रही हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
113 साल की दादी के इलाज में परेशानी महिला ने वीडियो में अपनी 113 वर्षीय दादी की परेशानी बताते हुए कहा कि रास्ता बाधित होने से एंबुलेंस घर के दरवाजे तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे जरूरत के समय दादी को इलाज के लिए ले जाने में दिक्कत होती है। नेहा ने बताया कि वह अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं और रास्ते की समस्या दूर कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। हालांकि, एंबुलेंस की पहुंच और रास्ते की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विधायक-सांसद और प्रशासन पर लगाए आरोप नेहा ने खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, सांसद शशांक मणि त्रिपाठी और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनके विरोधियों से मिले हुए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से न्याय की गुहार वीडियो में नेहा ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के साथ विधायक व सांसद से भी मदद की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके या परिवार के साथ कोई घटना होती है तो इसके लिए विरोधी पक्ष और प्रशासन जिम्मेदार होंगे। फिलहाल, मामले में दूसरे पक्ष, संबंधित जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रास्ते पर कथित कब्जे को लेकर प्रशासन की ओर से किसी जांच या कार्रवाई की पुष्टि भी नहीं हुई है।
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