दहेज मृत्यु में पति को 10 साल की सजा:अलीगढ़ में 2020 की घटना में न्यायालय का फैसला,सास-ससुर बरी

Oct 08, 2026 - 20:46
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दहेज मृत्यु में पति को 10 साल की सजा:अलीगढ़ में 2020 की घटना में न्यायालय का फैसला,सास-ससुर बरी
फास्ट ट्रैक कोर्ट-01 ने वर्ष 2020 के दहेज मृत्यु मामले में पति हरीश को दोषी मानते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सास रजनी देवी और ससुर पप्पू सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह जानकारी एडीजीसी स्वर्णलता वर्मा ने दी। मामला चंडौस क्षेत्र के जामुनका गांव का है। पूजा की शादी 2 दिसंबर 2019 को हरीश से हुई थी। अभियोजन के अनुसार शादी के बाद से ही अतिरिक्त दहेज में सोने की चेन और कार की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाता था। 14 अक्टूबर 2020 की रात मायके वालों को पूजा की मौत की सूचना मिली। उसका शव फंदे पर लटका मिला था। मृतका के भाई अरुण कुमार की तहरीर पर पति हरीश, सास-ससुर समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सात गवाह पेश किए। इनमें मृतका का भाई, मां, पुलिस और चिकित्सकीय साक्षी शामिल रहे। अदालत ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता का दोषी माना। 304बी में 10 साल की सजा अदालत ने हरीश को धारा 304बी में 10 साल का सश्रम कारावास, धारा 498ए में दो साल की सजा और 5 हजार रुपए जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 में एक साल की सजा और 5 हजार रुपए जुर्माना सुनाया। जुर्माना न देने पर दोनों मामलों में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और पूर्व में जेल में बिताई अवधि का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने हत्या की धारा 302 का आरोप सिद्ध नहीं माना। वहीं सास रजनी देवी और ससुर पप्पू सिंह के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं होने पर उन्हें बरी कर दिया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी हरीश को पुलिस अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया गया।

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