धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर लिखा 'टाटा बाय-बाय':कुशाग्र सागर के पाला बदलने की चर्चा, बोले- स्वाभिमान से समझौता नहीं, चुनाव जरूर लड़ूंगा
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सियासी चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं। आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के फेसबुक पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखने के बाद अब बिसौली के पूर्व भाजपा विधायक कुशाग्र सागर को लेकर भी पाला बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि कुशाग्र ने अभी किसी दूसरी पार्टी में जाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनकी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों ने इन अटकलों को हवा दे दी है। बिसौली की सियासत में इस चर्चा की बड़ी वजह सपा विधायक आशुतोष मौर्य को माना जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के बाद उनके भाजपा के करीब आने की चर्चा होती रही है। अब विधानसभा चुनाव में भाजपा से आशुतोष मौर्य के मैदान में उतरने की अटकलों ने 2017 से 2022 तक विधायक रहे कुशाग्र सागर के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग करने वाले कई विधायकों को बाद में भाजपा की ओर से अलग-अलग स्तर पर राजनीतिक लाभ मिलने की चर्चा रही। मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, राकेश पांडेय, विनोद चतुर्वेदी और पूजा पाल जैसे नाम इसमें सामने आते रहे हैं। इसके मुकाबले आशुतोष मौर्य को अब तक बैकडोर सपोर्ट मिलने की चर्चा रही है। इसी वजह से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से उनकी दावेदारी को लेकर अटकलें मजबूत हो रही हैं। कुशाग्र बोले- बिसौली मेरा परिवार कुशाग्र सागर ने भास्कर से बातचीत में कहा कि 2022 का चुनाव हारने के बाद भी वह पार्टी में लगातार सक्रिय रहे। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी के लिए पूरी मेहनत की। अगर पार्टी को यह दिखाई नहीं दिया तो वह क्या कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि बिसौली विधानसभा उनका परिवार है और परिवार की राय के अनुसार ही आगे का फैसला होगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि स्वाभिमान से किसी स्तर पर समझौता नहीं करेंगे और चुनाव जरूर लड़ेंगे। फेसबुक पोस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल कुशाग्र सागर ने 27 सितंबर को फेसबुक पर लिखा था कि वह हानि-लाभ के तराजू पर आत्मसम्मान को नहीं तौलते। उन्होंने कहा कि उन्हें न किसी के वर्चस्व का भय है और न ही जी-हुजूरी की आदत है। पोस्ट में उन्होंने अपने पिता के आशीर्वाद और जनता के अटूट प्रेम को अपनी ताकत बताया। साथ ही लिखा कि स्वाभिमान गिरवी रखकर साम्राज्य का सुख उन्हें स्वीकार नहीं है। इसी पोस्ट को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पुराने चेहरे और नए दावेदार के बीच संतुलन की चुनौती धर्मेंद्र कश्यप के संकेतों के बाद अब कुशाग्र सागर को लेकर उठी चर्चाओं ने भाजपा के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। अगर कुशाग्र सागर अपने अगले कदम को लेकर कोई बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हैं तो इसका सीधा असर बिसौली के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है। वहीं, आशुतोष मौर्य की संभावित दावेदारी की स्थिति में भाजपा को पुराने चेहरे और नए दावेदार के बीच संतुलन साधना होगा।
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