डिजिटल पेमेंट पर शुल्क के खिलाफ उतरे व्यापारी:पितृपक्ष में UPI मशीनों का किया तर्पण, MDR शुल्क वापस लेने की उठाई मांग
कानपुर में यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने के विरोध में शुक्रवार को भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने सरसैया घाट पर प्रदर्शन किया। पितृपक्ष के मौके पर व्यापारियों ने यूपीआई बॉक्स और मशीनों का तर्पण कर प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने 15 अक्टूबर से लागू किए जाने वाले शुल्क को वापस लेने की मांग उठाई। UPI मशीनों का तर्पण कर जताया विरोध प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने यूपीआई बॉक्स और मशीनों का प्रतीकात्मक त्याग कर उनका तर्पण किया। पितृपक्ष में विरोध का यह अनोखा तरीका शहर में चर्चा का विषय रहा। व्यापारियों ने कहा कि यूपीआई भुगतान व्यवस्था ने कारोबार में लेनदेन को आसान बनाया है। अगर इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इसका असर व्यापारियों के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। MDR शुल्क वापस लेने की मांग भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR शुल्क और उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने का प्रस्ताव है। इससे कुल प्रभावी शुल्क 0.472 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल छोटे-बड़े दुकानदारों के साथ ही ग्राहक भी बड़े पैमाने पर करते हैं। ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ज्ञानेश बोले- MDR शुल्क से बढ़ेगी लागत व्यापारी ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि यूपीआई आज व्यापारिक लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। बड़ी संख्या में दुकानदार ग्राहक से भुगतान लेने के लिए यूपीआई बॉक्स और मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में MDR शुल्क लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित शुल्क को वापस लिया जाए, ताकि व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। व्यापारियों ने कहा कि वह यूपीआई पर MDR शुल्क लगाने के प्रस्ताव के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
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