दलित महिला की शिकायत पर हाईकोर्ट सख्त:तत्कालीन करेली थाना प्रभारी आशीष सिंह समेत अन्य से जवाब मांगा
करेली थाना क्षेत्र की अनुसूचित जाति की महिला अंकिता गौतम की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरक शपथपत्र स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव गृह, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज, करेली थानाध्यक्ष और तत्कालीन थानाध्यक्ष आशीष सिंह की ओर से उपस्थित अपर शासकीय अधिवक्ता से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। पीड़िता के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और देवेंद्र सिंह की बेंच को जानकारी दी कि किरायेदारी विवाद को लेकर विपक्षियों पर घर में घुसकर मारपीट करने, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और मकान खाली करने की धमकी देने के आरोप है।
शिकायत में पीड़िता के पिता को गंभीर चोट लगने की बात भी कही गई है। अधिवक्ता का दावा है कि अप्रैल 2026 में घटना के नौ दिन बाद मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन पांच महीने तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। जिस पर हाइकोर्ट ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। दोबारा हमले और पुलिस की भूमिका पर सवाल अधिवक्ता के अनुसार अगस्त 2026 में दोबारा घर में घुसकर मारपीट, अभद्रता और दरवाजा उखाड़कर ले जाने के आरोप लगाए गए। पीड़िता का आरोप है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष आशीष सिंह ने इस घटना की प्राथमिकी दर्ज नहीं की, जबकि विपक्षी की शिकायत पर पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
17 सितंबर को फिर धमकी मिलने की शिकायत थाना करेली और आईजीआरएस के माध्यम से किए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने का दावा किया गया है। SC/ST एक्ट की धारा 4 के तहत कार्रवाई की मांग पीड़िता ने तत्कालीन थानाध्यक्ष आशीष सिंह के खिलाफ विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को शिकायत दी है।
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने अदालत में SC/ST एक्ट की धारा 4 के तहत लोक सेवक द्वारा कर्तव्यों की कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया। अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी सपा का पूर्व पार्षद नंद लाल निषाद ,निवासी करेलाबाग है जिसके विरुद्ध 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज है जो अब वर्तमान में भाजपा में शामिल होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
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