डीएमके-कांग्रेस टकराव से इंडिया गठबंधन में दरार

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया है। डीएमके ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर गठबंधन के साथ विश्वासघात करने तथा चुनावी नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

डीएमके-कांग्रेस टकराव से इंडिया गठबंधन में दरार

दि राइजिंग न्यूज़ | चेन्नई | 17 जून 2026

तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के रिश्तों में आई खटास अब सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है। इससे विपक्षी INDIA गठबंधन की एकता पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।

डीएमके ने लगाए गंभीर आरोप

डीएमके ने कांग्रेस पर गठबंधन धर्म का पालन न करने और चुनाव के दौरान सहयोगी दलों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने ऐसे कदम उठाए जिनसे गठबंधन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र में प्रकाशित संपादकीय में कांग्रेस नेतृत्व और विशेष रूप से राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल गांधी पर सीधा निशाना

डीएमके के मुखपत्र में राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा गया कि विपक्षी एकता की बात करने से पहले कांग्रेस को अपने सहयोगी दलों के साथ संबंधों की समीक्षा करनी चाहिए। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि गठबंधन के भीतर रहते हुए भी सहयोगी दलों के हितों की अनदेखी की गई। डीएमके ने यह भी दावा किया कि कई विपक्षी दल पहले भी कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर असंतोष जता चुके हैं।

सहयोगियों के बीच अविश्वास की चर्चा

संपादकीय में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों का भी उल्लेख किया गया। दावा किया गया कि विभिन्न अवसरों पर इन दलों ने कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन दावों पर संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक संयुक्त प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वाम दलों का भी जिक्र

डीएमके के मुखपत्र में कांग्रेस और वामपंथी दलों के संबंधों का भी उल्लेख किया गया। इसमें कुछ पुराने राजनीतिक बयानों और चुनावी आरोपों को आधार बनाकर राहुल गांधी की आलोचना की गई। संपादकीय में कहा गया कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए सभी सहयोगी दलों के प्रति समान सम्मान और विश्वास आवश्यक है।

कांग्रेस की ओर से नहीं आया विस्तृत जवाब

डीएमके के आरोपों के बाद कांग्रेस की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं ने गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि दोनों दलों के बीच मतभेद जल्द दूर नहीं हुए तो विपक्षी गठबंधन को भविष्य में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर

तमिलनाडु में उभरा यह विवाद केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। INDIA गठबंधन के प्रमुख घटकों के बीच बढ़ती दूरी राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक संवाद के जरिए मतभेद सुलझते हैं या यह टकराव और गहराता है।