100 वैज्ञानिकों के बाद सरकार का एक्शन!

इसरो के लगभग 100 वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा इस्तीफा तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने नियमों को सख्त कर दिया है। अब गगनयान सहित राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के इस्तीफे सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसे सभी मामलों में अंतिम निर्णय अंतरिक्ष विभाग की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

100 वैज्ञानिकों के बाद सरकार का एक्शन!

दि राइजिंग न्यूज़ | बेंगलुरु | 16 जुलाई 2026

इसरो में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफा तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने नियमों को सख्त कर दिया है। सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के लगातार सेवा छोड़ने से गगनयान सहित कई राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी कारण अब ऐसे मामलों में सामान्य प्रक्रिया के तहत मंजूरी नहीं दी जाएगी, बल्कि प्रत्येक आवेदन की विस्तृत समीक्षा कर राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

वैज्ञानिकों के इस्तीफों के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में पिछले कुछ समय से वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा बड़ी संख्या में इस्तीफा तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन दिए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के लगातार सेवा छोड़ने से देश की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण अंतरिक्ष विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे मामलों में पहले जैसी सामान्य प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। प्रत्येक आवेदन की विस्तृत जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी किसी महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़ा है या नहीं। सरकार का उद्देश्य केवल कर्मचारियों के इस्तीफों को रोकना नहीं, बल्कि देश के वैज्ञानिक संसाधनों और वर्षों के अनुभव को सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य की अंतरिक्ष योजनाएं प्रभावित न हों।

गगनयान सहित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को बनाया सर्वोच्च प्राथमिकता

अंतरिक्ष विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों में विशेष रूप से गगनयान मिशन और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि इन अभियानों में कार्यरत वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय से अनुसंधान, परीक्षण और तकनीकी विकास में लगे हुए हैं। यदि ऐसे कर्मचारी अचानक सेवा छोड़ देते हैं तो परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ सकती है, तकनीकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मिशनों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि अब इन परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। प्रत्येक मामले की अलग-अलग समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी राष्ट्रीय परियोजना को नुकसान न पहुंचे।

अब हर आवेदन पर अंतरिक्ष विभाग करेगा अंतिम फैसला

नई व्यवस्था के अनुसार यदि कोई वैज्ञानिक, अभियंता या तकनीकी कर्मचारी इस्तीफा देना चाहता है अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करता है, तो संबंधित केंद्र के निदेशक को पहले पूरे मामले का मूल्यांकन करना होगा। इसके बाद अपनी स्पष्ट अनुशंसा के साथ आवेदन अंतरिक्ष विभाग को भेजा जाएगा। अंतिम स्वीकृति केवल विभाग स्तर पर ही दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बिना उच्च स्तर की समीक्षा के कोई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सेवा से अलग न हो सके। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से राष्ट्रीय परियोजनाओं में निरंतरता बनी रहेगी और अनुभवी वैज्ञानिकों की कमी के कारण किसी भी मिशन की प्रगति प्रभावित नहीं होगी।

वर्ष 2020 में लागू व्यवस्था को बदला गया

केंद्र सरकार के नए आदेश के साथ वर्ष 2020 में लागू प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। उस समय इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशकों और प्रमुखों को समूह 'क' के वैज्ञानिकों तथा तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। अब सरकार ने इस व्यवस्था को बदलते हुए इन मामलों का अंतिम अधिकार अंतरिक्ष विभाग के पास सुरक्षित कर दिया है। सरकार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों को देखते हुए उच्च स्तर पर निगरानी आवश्यक हो गई है। इससे प्रत्येक आवेदन की गंभीरता, संबंधित परियोजना की आवश्यकता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जा सकेगा।

राष्ट्रीय हित और भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं को सुरक्षित रखने पर सरकार का जोर

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि हाल के समय में वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों द्वारा बड़ी संख्या में सेवा छोड़ने के अनुरोध प्राप्त हुए हैं। यदि यह सिलसिला इसी प्रकार जारी रहता है तो गगनयान सहित कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अंतरिक्ष विभाग का मानना है कि किसी भी अंतरिक्ष मिशन की सफलता केवल आधुनिक तकनीक पर नहीं, बल्कि अनुभवी वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता पर भी निर्भर करती है। इसलिए सरकार ने राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। इस कदम का उद्देश्य भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गति, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिष्ठा को बनाए रखना है।


महत्वपूर्ण बिंदु

  • केंद्र सरकार ने इसरो में वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के बढ़ते इस्तीफों तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों को गंभीरता से लेते हुए नियमों को पहले की तुलना में अधिक सख्त बना दिया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में कार्यरत अनुभवी वैज्ञानिकों का अचानक सेवा छोड़ना देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है।

  • गगनयान मिशन और अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे अब सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। प्रत्येक आवेदन की अलग से समीक्षा होगी और यह देखा जाएगा कि संबंधित कर्मचारी की भूमिका परियोजना के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

  • अब किसी भी वैज्ञानिक, अभियंता या तकनीकी कर्मचारी के इस्तीफे अथवा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन पर अंतिम निर्णय संबंधित केंद्र का निदेशक नहीं, बल्कि अंतरिक्ष विभाग करेगा। केंद्र के निदेशक केवल अपनी अनुशंसा के साथ पूरा मामला विभाग को भेजेंगे।

  • सरकार ने वर्ष 2020 में लागू उस प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव कर दिया है, जिसके तहत इसरो केंद्रों के प्रमुखों को समूह 'क' के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। अब यह अधिकार वापस लेकर विभाग स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया है।

  • सरकार का मानना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों के लगातार सेवा छोड़ने से गगनयान, उपग्रह प्रक्षेपण, अंतरिक्ष अनुसंधान तथा अन्य रणनीतिक परियोजनाओं की समयसीमा और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है।

  • अंतरिक्ष विभाग का उद्देश्य केवल इस्तीफों पर नियंत्रण करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की उपलब्धता बनी रहे और भविष्य की सभी परियोजनाएं निर्धारित समय पर सफलतापूर्वक पूरी हो सकें।