बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर बड़ा तोहफा, महिलाओं को 1 लाख तक सब्सिडी और टैक्स में भारी छूट
बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को मंजूरी देते हुए बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के तहत महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार पर 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी और अन्य वाहनों पर टैक्स में छूट दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक राज्य में 30 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाना है।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 14 मई 2026
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें लगातार नई नीतियां लागू कर रही हैं। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को मंजूरी देकर बड़ा कदम उठाया है। इस नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को भारी सब्सिडी और टैक्स में राहत दी जाएगी। खासकर महिलाओं के लिए यह योजना और अधिक फायदेमंद साबित होगी, क्योंकि उन्हें इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा और प्रदूषण में कमी आएगी।
महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार पर 1 लाख तक की सब्सिडी
नई नीति के अनुसार बिहार में इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहन खरीदने वाली महिलाओं को सरकार की ओर से सीधे 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह कदम महिलाओं को स्वच्छ और किफायती परिवहन की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्वतंत्रता दोनों को बढ़ावा मिलेगा। यह सहायता राशि वाहन खरीद की लागत को काफी हद तक कम कर देगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी तेजी आने की उम्मीद है।
दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर भी मिलेगी सहायता
नई नीति में केवल कार ही नहीं बल्कि अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों को भी शामिल किया गया है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को 12 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इलेक्ट्रिक मालवाहक तिपहिया वाहनों पर भी अलग-अलग वर्गों के लिए 50 हजार से 60 हजार रुपये तक की सब्सिडी तय की गई है। इससे छोटे व्यवसायियों और डिलीवरी सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
टैक्स में भारी छूट से सस्ती होंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियां
बिहार सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटर वाहन कर में भी बड़ी राहत दी है। नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर 50 प्रतिशत तक टैक्स में छूट दी जाएगी। इससे वाहन की कुल लागत कम होगी और आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान हो जाएगा। सरकार का कहना है कि टैक्स में यह छूट ईंधन आधारित वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर लोगों का रुझान बढ़ाएगी। साथ ही यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
पुरानी गाड़ियों के स्क्रैप पर अतिरिक्त लाभ
नई नीति में पुरानी गाड़ियों को हटाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी वाहन को स्क्रैप करता है तो उसे केंद्र सरकार की नीति के अनुसार अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे सड़कों पर पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की संख्या कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे स्वच्छ परिवहन प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम पर्यावरण और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए लाभदायक माना जा रहा है।
2030 तक बड़ा लक्ष्य, 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन का उद्देश्य
बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसके अनुसार नए पंजीकरण होने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार लगातार नीतियों और योजनाओं में सुधार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो हर साल करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत संभव होगी। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलेगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत राज्य में चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने को बढ़ावा देगी। शॉपिंग मॉल, होटल, पेट्रोल पंप और बड़े भवनों में चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। सरकार का मानना है कि मजबूत चार्जिंग व्यवस्था के बिना इलेक्ट्रिक वाहन नीति सफल नहीं हो सकती।
प्रदूषण और ईंधन खर्च में आएगी कमी
सरकार का दावा है कि इस नीति से राज्य में प्रदूषण स्तर में काफी कमी आएगी। पेट्रोल और डीजल की खपत घटने से लोगों का परिवहन खर्च भी कम होगा। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति सही तरीके से लागू होती है तो बिहार इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। इससे आने वाले वर्षों में स्वच्छ और किफायती परिवहन प्रणाली विकसित होने की संभावना है।