ड्रग्स टेस्ट में फेल हुए थे शोएब अख्तर!

करीब बीस वर्ष पुराने मादक पदार्थ परीक्षण विवाद को लेकर पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर एक बार फिर चर्चा में हैं। यह मामला दो हजार छह की चैंपियंस ट्रॉफी से पहले सामने आया था।

ड्रग्स टेस्ट में फेल हुए थे शोएब अख्तर!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026

करीब बीस वर्ष पहले पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का एक ऐसा विवाद सामने आया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम मादक पदार्थ परीक्षण विवाद में आने के बाद क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया था। उस समय दोनों खिलाड़ी पाकिस्तान टीम के सबसे महत्वपूर्ण गेंदबाजों में गिने जाते थे और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े प्रतियोगिता से ठीक पहले उनके खिलाफ सामने आई खबर ने टीम की तैयारियों को बड़ा झटका दिया था। आज दो दशक बाद यह मामला फिर चर्चा में है और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर उस समय क्या हुआ था।

चैंपियंस ट्रॉफी से पहले पाकिस्तान को लगा था बड़ा झटका

साल दो हजार छह में चैंपियंस ट्रॉफी शुरू होने से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। टीम के पास दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में शामिल शोएब अख्तर और उभरते हुए तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ जैसे खिलाड़ी मौजूद थे। लेकिन प्रतियोगिता से ठीक पहले दोनों खिलाड़ियों के मादक पदार्थ परीक्षण में प्रतिबंधित तत्व मिलने का दावा सामने आया। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने दोनों को टीम से बाहर कर दिया। इस फैसले से पूरी टीम की रणनीति प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान क्रिकेट की छवि को भी नुकसान पहुंचा।

क्या था पूरा मादक पदार्थ परीक्षण विवाद

मादक पदार्थ परीक्षण के दौरान दोनों खिलाड़ियों के नमूनों में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने की बात सामने आई थी। इस खबर ने पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी, क्योंकि उस समय खेलों में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान काफी सख्त चल रहा था। खिलाड़ियों पर यह जिम्मेदारी होती है कि वे किसी भी दवा या पूरक पदार्थ का सेवन करने से पहले उसके घटकों की पूरी जानकारी रखें। इसी कारण यह मामला केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और अन्य क्रिकेट बोर्डों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।

शोएब अख्तर ने हकीम की दवा का दिया था हवाला

विवाद के बाद शोएब अख्तर ने सार्वजनिक रूप से अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर किसी प्रतिबंधित पदार्थ का सेवन नहीं किया था। उनका दावा था कि उन्होंने एक हकीम द्वारा दी गई दवा का उपयोग किया था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उसमें ऐसा कोई तत्व मौजूद है जो खेल के नियमों के अनुसार प्रतिबंधित माना जाता है। बाद में उन्होंने अपनी डायरी और विभिन्न साक्षात्कारों में भी इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया और अपनी बेगुनाही का पक्ष रखा।

मोहम्मद आसिफ भी विवाद में आए थे

इस मामले में केवल शोएब अख्तर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ का नाम भी सामने आया था। उनके मादक पदार्थ परीक्षण में भी प्रतिबंधित तत्व मिलने का दावा किया गया था। दोनों खिलाड़ियों के एक साथ टीम से बाहर होने से पाकिस्तान की तेज गेंदबाजी कमजोर पड़ गई। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि यदि दोनों खिलाड़ी उपलब्ध रहते तो टीम का प्रदर्शन अलग हो सकता था। यह घटना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए सबसे बड़े विवादों में गिनी जाती है।

पूरी दुनिया में हुई थी पाकिस्तान क्रिकेट की आलोचना

यह विवाद सामने आने के बाद केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों, पूर्व खिलाड़ियों और खेल विश्लेषकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। कई लोगों ने खिलाड़ियों को दवाओं के उपयोग में अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी, जबकि कुछ ने खेल संगठनों से मादक पदार्थ विरोधी नियमों को और अधिक सख्ती से लागू करने की मांग की। इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में अनुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

आज फिर क्यों चर्चा में है यह मामला

करीब बीस वर्ष बाद यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पुराने क्रिकेट विवादों और खिलाड़ियों के करियर के चर्चित किस्सों पर चर्चा के दौरान इस मामले का उल्लेख फिर से किया जा रहा है। शोएब अख्तर आज भी पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और उनके करियर से जुड़े विवाद अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। यही वजह है कि दो दशक पुराना यह मामला एक बार फिर लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।

क्रिकेट को मिला बड़ा सबक

इस पूरे घटनाक्रम ने खिलाड़ियों, क्रिकेट बोर्डों और खेल संस्थाओं को यह संदेश दिया कि किसी भी दवा या पूरक पदार्थ का उपयोग पूरी जानकारी के साथ ही किया जाना चाहिए। इसके बाद दुनिया भर में मादक पदार्थ परीक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया गया तथा खिलाड़ियों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए। आज भी यह मामला खेल इतिहास के उन विवादों में गिना जाता है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुशासन और जवाबदेही को नई दिशा दी।