दुर्गाबाड़ी में महाअष्टमी पर संधि-पूजा में की मां की आराधना:220वें दुर्गा पूजा महोत्सव में सुबह से पहुंचे भक्त, 108 दीप जलाकर की पूजा-अर्चना

Oct 19, 2026 - 10:24
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दुर्गाबाड़ी में महाअष्टमी पर संधि-पूजा में की मां की आराधना:220वें दुर्गा पूजा महोत्सव में सुबह से पहुंचे भक्त, 108 दीप जलाकर की पूजा-अर्चना
बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति की ओर से आयोजित 220वें दुर्गा पूजा महोत्सव में सोमवार को महाअष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। लोगों ने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। सुबह पूजा-अर्चना के बाद की पुष्पांजलि महाअष्टमी के अवसर पर सुबह मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की गई। बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भक्तों ने मां को फूल अर्पित कर पुष्पांजलि दी। महाअष्टमी को बंगाली दुर्गा पूजा का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के शक्ति और साहस के स्वरूप की पूजा की जाती है। साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी दिया जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु भक्तिभाव से मां का स्मरण करते नजर आए। संधि पूजा में 108 दीप जलाकर की आराधना महाअष्टमी पर संधि पूजा का विशेष महत्व है। बंगाली समाज में इसे मां दुर्गा की आराधना का सबसे खास और भावनात्मक समय माना जाता है। श्रद्धालु पूरे साल इस पूजा का इंतजार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में की जाती है। इस तरह यह पूजा कुल 48 मिनट की होती है। यह समय महाअष्टमी और महानवमी के मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी समय मां दुर्गा ने चंड और मुंड नाम के असुरों का वध करने के लिए चामुंडा का रूप धारण किया था। इसलिए संधि पूजा में मां की शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत को याद किया जाता है। इस दौरान चंडी पाठ, विशेष मंत्रों का जाप और 108 दीप जलाकर मां की पूजा की जाती है। संधि पूजा बंगाली परिवारों के लिए आस्था के साथ भावनाओं से जुड़ा अवसर भी है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा से जीवन में शक्ति, सुरक्षा, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति में संधि पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव से मां दुर्गा की आराधना की। समिति पदाधिकारियों ने दी महाअष्टमी की शुभकामनाएं समिति अध्यक्ष अमिताभ मुखर्जी ने महाअष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महाअष्टमी और संधि पूजा मां दुर्गा की शक्ति, साहस और धर्म की जीत का प्रतीक हैं। 220 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि बंगाली समाज की सांस्कृतिक पहचान और आपसी एकता को भी दर्शाती है। उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं। महासचिव अभय मुखर्जी ने कहा कि बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति के लिए 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव गर्व और भावनाओं से जुड़ा अवसर है। संधि पूजा बंगाली समाज की आस्था और मां दुर्गा के प्रति विश्वास का प्रतीक है। समिति का प्रयास है कि पारंपरिक पूजा और लोगों की भागीदारी के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक बंगाली संस्कृति और परंपराओं को पहुंचाया जाए। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सहयोगकर्ताओं का आभार जताया। पूजा सचिव सुब्रोतो विश्वास ने कहा कि महाअष्टमी और संधि पूजा बंगाली दुर्गा पूजा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। संधि पूजा के 48 मिनट श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखते हैं। इस दौरान भक्त मां के दिव्य स्वरूप का स्मरण कर शक्ति, साहस और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की कृपा सभी पर बनी रहे और समाज में प्रेम, भाईचारे और सकारात्मकता का माहौल बना रहे। 220 साल से निभाई जा रही परंपरा बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ का 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव शहर की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई वर्षों से यह आयोजन बंगाली रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने, लोगों को आपस में जोड़ने और मां दुर्गा के प्रति आस्था बनाए रखने का माध्यम रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं और शहरवासियों से दुर्गा पूजा महोत्सव में शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने की अपील की। समिति के सदस्यों ने संभाली व्यवस्थाएं महाअष्टमी के आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों का सहयोग रहा। अजय मुखर्जी, डॉ. सुब्रोतो सेन, संतोश्री विश्वास, जूही दत्ता, अभिनव दत्ता, प्रदीप मुखर्जी, नोबेंदु राय चौधरी, विश्वजीत विश्वास और संजय बैनर्जी सहित अन्य सदस्यों ने पूजा और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

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