एआई से विकसित होंगे नए फ्रेगरेंस-फ्लेवर उत्पाद:FFDC पहुंचे सीएसजेएमयू के वीसी, बोले- वेलनेस से जुड़े कोर्स शुरु होंगे

Oct 03, 2026 - 22:36
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एआई से विकसित होंगे नए फ्रेगरेंस-फ्लेवर उत्पाद:FFDC पहुंचे सीएसजेएमयू के वीसी, बोले- वेलनेस से जुड़े कोर्स शुरु होंगे
कानपुर के फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर (एफएफडीसी) में शनिवार को एमएससी केमिस्ट्री (फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर) और एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों का इंडक्शन कार्यक्रम हुआ। विद्यार्थियों को एरोमा टूलकिट भी वितरित की गई। मुख्य अतिथि सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि एआई की मदद से सुगंधित अणुओं के अध्ययन, फॉर्मुलेशन डिजाइन और नए उत्पादों के विकास को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, तकनीक और स्टार्टअप के अवसरों से जुड़ने की बात कही। एआई से सुगंधित अणुओं के अध्ययन से लेकर फॉर्मुलेशन तक में मदद एआई की मदद से सुगंधित अणुओं के अध्ययन, कच्चे पदार्थों के चयन, फॉर्मुलेशन डिजाइन, डेटा विश्लेषण और नए उत्पादों के विकास को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। प्रो. पाठक ने कहा कि सीएसजेएमयू विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की संभावनाओं पर काम करेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक तेल, प्राकृतिक सुगंध, परफ्यूम, फ्लेवर, कॉस्मेटिक्स और वेलनेस उत्पादों के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए रोजगार के साथ स्टार्टअप के अवसर भी हैं। भविष्य में वेलनेस से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। वीसी ने उत्पादों की प्रदर्शनी देखी प्रो. पाठक ने विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए फ्रेगरेंस और फ्लेवर उत्पादों की प्रदर्शनी देखी और उनके नवाचार, प्रोजेक्ट व उत्पादों की संभावनाओं पर चर्चा की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. विनय कुमार पाठक और एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने किया। इस मौके पर फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष योगेश दुबे और फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर एसोसिएशन कन्नौज के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे। फ्रेगरेंस उद्योग तेजी से बदल रहा कोर्स समन्वयक डॉ. इंद्रेश कुमार शुक्ला ने ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी दी। कुलपति प्रो. पाठक ने कहा कि फ्रेगरेंस और फ्लेवर उद्योग तेजी से बदल रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान और उद्यमिता से जोड़ना जरूरी है। उनके वैज्ञानिक विचारों और नवाचारों से नए उत्पाद और स्टार्टअप विकसित किए जा सकते हैं।

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