एचआईवी रोकथाम को लेकर चिकित्साधिकारियों की बढ़ी जिम्मेदारी:कार्यशाला में दिया गया प्रशिक्षण
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में शनिवार को चिकित्साधिकारियों के लिए ओरिएंटेशन कम सेंसिटाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एचआईवी/एड्स की रोकथाम, जांच, उपचार और देखभाल से जुड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। साथ ही जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं समयबद्ध तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया गया। चिकित्साधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एचआईवी संक्रमण की वर्तमान स्थिति, बचाव के उपाय, एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेवाओं तथा एचआईवी से संबंधित जांच, उपचार, परामर्श और देखभाल की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम-2017 के प्रावधानों, हाई रिस्क ग्रुप और संक्रमित व्यक्तियों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बताया गया। चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में एचआईवी की रोकथाम एवं नियंत्रण से संबंधित कार्यक्रमों को गंभीरता से लागू करें। संवेदनशील और जरूरतमंद लोगों तक जांच, उपचार तथा परामर्श की सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास करने पर भी विशेष बल दिया गया। इसके अलावा संबंधित टोल-फ्री नंबर के माध्यम से उपलब्ध सेवाओं की जानकारी भी साझा की गई। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर डॉ. रवि गुप्ता, राजेश रंजन और अवंतिका बाजपेयी ने विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने एचआईवी से संबंधित सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप कुमार शुक्ला, एसीएमओ डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. पीसी भारती, दिशा से दीपाली मौर्य और डॉ. सौरभ शुक्ला तथा पीएमडीटी से रमनिश मिश्रा सहित टीबी एवं एचआईवी कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी और मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यशाला के माध्यम से चिकित्साधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित लोगों को परामर्श एवं देखभाल की सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
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