एक दिन की डीएम बनीं कक्षा 9 की छात्रा तन्वी:स्कूलों में शौचालय और खेल मैदान की कमी पर उठाए सवाल, सड़कों के टेंडर में पारदर्शिता की मांग
उन्नाव में कक्षा नौ में पढ़ने वाली तन्वी तिवारी मंगलवार को एक दिन की जिलाधिकारी बनीं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, नवाबगंज की छात्रा ने डीएम की कुर्सी पर बैठकर करीब 15 से 20 फरियादियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया। संबंधित अधिकारियों से समस्याओं के समाधान की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने भविष्य में पढ़ाई करके वास्तविक जिलाधिकारी बनने का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने बताया कि एक दिन का कलेक्टर कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य बच्चों में प्रशासनिक दक्षता विकसित करना और उन्हें भविष्य के लक्ष्यों के लिए प्रेरित करना है। इससे बच्चों को प्रशासनिक व्यवस्था समझने, लोगों की समस्याएं सुनने और समाज के लिए काम करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी है, ताकि वे मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य हासिल कर सकें और देशहित में योगदान दें। स्कूलों में सुविधाओं की कमी पर जताई चिंता तन्वी ने कहा कि जिलाधिकारी का काम सिर्फ कार्यालय में बैठकर कागजी कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि गांवों में जाकर स्कूलों की स्थिति का जायजा लेना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, कुछ विद्यालयों की व्यवस्थाएं अच्छी हैं, लेकिन कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आधे स्कूलों में खेल मैदान और शौचालय तक नहीं हैं। जिन विद्यालयों में शौचालय हैं, वहां भी साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं रहती। उन्होंने स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार पर जोर दिया।
सड़कों के टेंडर में पारदर्शिता की मांग एक दिन की डीएम ने सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से जातिकपुर की सड़क समेत जिले की अन्य सड़कों की स्थिति सुधारने की मांग की। साथ ही सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की बात कही। घर गिराए जाने की शिकायत पर आवास दिलाने की अपील फरियादियों की समस्याएं सुनने के दौरान तन्वी के सामने एक व्यक्ति ने घर गिराए जाने और रहने के लिए मकान की समस्या रखी। तन्वी के अनुसार, फरियादी ने खुद को कमजोर सामाजिक वर्ग से बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। इस पर उन्होंने डीएम से मामले को संवेदनशीलता से देखने और पात्रता के अनुसार संबंधित व्यक्ति को आवास उपलब्ध कराने में मदद करने का अनुरोध किया। तन्वी ने कहा कि वह आगे पढ़ाई करके जिलाधिकारी बनना चाहती हैं और देश की रक्षा के साथ समाज के लिए अच्छे कार्य करना चाहती हैं। उन्होंने एक दिन की डीएम बनने के अनुभव को सुखद बताया। कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें प्रशासनिक कामकाज समझने और जनसमस्याओं के प्रति जिम्मेदारी का अनुभव करने का अवसर मिला।
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