एक घंटे विरोध-सिर्फ चौखट तोड़कर लौटी ADA टीम:अलीगढ़ के तुलसी रेजिडेंसी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर उठे सवाल, हाईकोर्ट के आदेश पर पांचवें तल का अवैध निर्माण गिराने पहुंची थी टीम

Oct 07, 2026 - 15:23
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एक घंटे विरोध-सिर्फ चौखट तोड़कर लौटी ADA टीम:अलीगढ़ के तुलसी रेजिडेंसी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर उठे सवाल, हाईकोर्ट के आदेश पर पांचवें तल का अवैध निर्माण गिराने पहुंची थी टीम
दुबे का पड़ाव स्थित तुलसी रेजिडेंसी में पांचवें तल पर बने कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त करने पहुंची अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) की टीम को बुधवार को जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा। करीब एक घंटे तक चले विरोध, नोकझोंक और धक्कामुक्की के बीच पुलिस ने किसी तरह स्थिति संभाली। इसके बाद टीम ने पांचवें तल पर बने फ्लैट की सिर्फ एक चौखट तोड़ी और उसे निकालकर वापस लौट गई। मौके पर मौजूद लोगों ने कार्रवाई को ‘खानापूर्ति’ और दिखावे की कार्रवाई बताया। उनका कहना था कि जिस निर्माण को हाईकोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्त करने के लिए एडीए टीम जेसीबी और मजदूरों के साथ पहुंची थी, उसमें वास्तविक ध्वस्तीकरण नहीं हुआ। कार्रवाई के दौरान बिल्डर के समर्थन में बड़ी संख्या में बाहरी लोग और कुछ नेता भी मौके पर पहुंच गए। कुछ कमेटी पदाधिकारियों के भी बिल्डर के पक्ष में खड़े होने की बात सामने आई। पुलिस फोर्स के साथ पहुंची थी टीम बुधवार दोपहर करीब 12 बजे एडीए की टीम जेसीबी और मजदूरों के साथ तुलसी रेजिडेंसी पहुंची। टीम का नेतृत्व एडीए सचिव राहुल विश्वकर्मा कर रहे थे। उनके साथ एडीए के अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस बल मौजूद था। प्रशासन की ओर से एसीएम तथा पुलिस की ओर से सीओ द्वितीय भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने पांचवें तल पर बने उस फ्लैट में कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया, जिसे एडीए की ओर से अवैध निर्माण के दायरे में माना गया है। बताया गया कि यह फ्लैट बिल्डर के परिवार का है और वर्तमान में इसी परिवार के लोग वहां रहते हैं। जैसे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय महिलाओं, निवासियों और बिल्डर के समर्थन में आए लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ बढ़ गई। करीब एक घंटे तक जमकर विरोध हुआ और धक्कामुक्की के हालात बन गए। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और महिला पुलिसकर्मियों को बीच में आकर मोर्चा संभालना पड़ा। चौखट निकाली और टीम लौट गई विरोध के बीच एडीए टीम ने पांचवें तल पर बने फ्लैट की एक चौखट तोड़ी और उसे बाहर निकाल लिया। इसके बाद टीम आगे की कार्रवाई किए बिना वापस लौट गई। कार्रवाई खत्म होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना था कि यदि हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई थी तो केवल चौखट निकालना पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से स्थानीय लोगों ने इसे कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति बताया। एडीए सचिव बोले-हाईकोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई एडीए सचिव राहुल विश्वकर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के क्रम में तुलसी रेजिडेंसी में कार्रवाई की जा रही है। मौके पर लोगों ने विरोध किया है। कार्रवाई जारी है। हालांकि बुधवार को टीम विरोध के बाद वापस लौट गई और पांचवें तल के कथित अवैध निर्माण का बड़ा हिस्सा मौके पर मौजूद रहा। क्या है पूरा मामला? तुलसी रेजिडेंसी का निर्माण गांधी पार्क क्षेत्र के दुबे का पड़ाव में करीब 800 वर्ग मीटर के भूखंड पर वर्ष 2013-14 के आसपास कराया गया था। एडीए के रिकॉर्ड के अनुसार भवन का स्वीकृत मानचित्र भूतल और चार मंजिल तक का था। आरोप है कि स्वीकृत मानचित्र से आगे बढ़कर पांचवें तल पर निर्माण कराया गया और वहां फ्लैट भी बनाए गए। बेसमेंट के निर्माण को लेकर भी स्वीकृत मानचित्र से अलग निर्माण मिलने की बात एडीए की ओर से कही गई है। बाद में भवन स्वामी की ओर से अनधिकृत निर्माण को नियमित कराने के लिए शमन का आवेदन किया गया। एडीए की शमन कार्रवाई में कुछ हिस्से को हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि निर्धारित हिस्सा नहीं हटाया गया। शिकायत से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला इसके बाद तुलसी रेजिडेंसी के एक स्थानीय निवासी ने एडीए में शिकायत की। कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के निर्देश दिए। निर्देश के बाद भी कार्रवाई लंबित रहने पर मामला अवमानना वाद तक पहुंच गया। एडीए को हाईकोर्ट में अपनी कार्रवाई के संबंध में जवाब भी दाखिल करना है। इसी पृष्ठभूमि में प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की तारीख तय की और एक दिन पहले अपार्टमेंट पर नोटिस भी चस्पा किया था। आरोप-पूरी छत पर बिल्डर का कब्जा तुलसी रेजिडेंसी के शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित अतिरिक्त निर्माण का असर उन्हें वर्षों से झेलना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बिल्डर ने पूरी छत पर कब्जा कर लिया और छत पर जाने वाली सीढ़ियों को भी निर्माण में शामिल कर लिया गया। निवासियों के मुताबिक इससे उन्हें छत का इस्तेमाल करने और सर्दियों में धूप में बैठने तक की सुविधा नहीं मिल सकी। फ्लैटों में पर्याप्त धूप नहीं आने की शिकायत भी निवासी करते रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार बिल्डर के सामने समस्या रखी, लेकिन समाधान नहीं हुआ। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। अतिरिक्त मंजिल पर विशेषज्ञ ने भी जताया संरचनात्मक जोखिम सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भवन में स्वीकृत सीमा से अतिरिक्त फ्लोर बनाए जाने पर नींव, कॉलम, बीम और स्लैब पर डिजाइन किए गए भार से अधिक दबाव पड़ सकता है। इससे समय के साथ दरार, स्लैब में झुकाव और संरचनात्मक कमजोरी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक खतरा भवन की डिजाइन, मिट्टी, निर्माण गुणवत्ता और अतिरिक्त निर्माण के भार पर निर्भर करता है। अब सवाल यह है कि हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना की स्थिति तक पहुंच चुके मामले में एडीए अगली कार्रवाई कब और किस तरह करता है। बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद विरोध के बाद कार्रवाई जिस तरह सीमित रही, उससे मौके पर मौजूद लोगों और निवासियों के बीच सवाल जरूर खड़े हुए हैं।

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