एक महीने में तीसरी बार सरयू में उफान पर:संतकबीरनगर के 18 गांव बाढ़ की चपेट में; धान की फसल बर्बाद, राहत का इंतजार

Oct 04, 2026 - 14:30
0
एक महीने में तीसरी बार सरयू में उफान पर:संतकबीरनगर के 18 गांव बाढ़ की चपेट में; धान की फसल बर्बाद, राहत का इंतजार
संतकबीरनगर में एक महीने के भीतर तीसरी बार सरयू नदी के जलस्तर में उफान आने से धनघटा तहसील क्षेत्र के करीब 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। अब नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है। तीन गांवों में अभी भी पानी जमा है, जबकि कई गांव चारों तरफ से पानी से घिरे हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, बाढ़ राहत सामग्री नहीं मिलने के आरोप से पीड़ितों में आक्रोश है। बाढ़ के दौरान कई गांवों में पानी लोगों के दरवाजे तक पहुंच गया था। आवागमन के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ा। अब पानी घटने के बाद रास्तों पर कीचड़ और गंदगी जमा है। इससे संक्रमण और बीमारी की आशंका बनी हुई है। छोटे स्कूली बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही है। तीन बार डूबी फसल, राहत का इंतजार सियरकला निवासी ज्ञानचंद्र और फूलचंद ने बताया कि इस साल लगातार तीन बार बाढ़ का पानी खेतों में घुस चुका है। इससे धान की फसल बर्बाद हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार फसल डूबने के बावजूद उन्हें अब तक राहत सामग्री नहीं मिली है। पीड़ितों का कहना है कि पड़ोसी जिले में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री दी गई, लेकिन यहां के परिवार अभी मदद का इंतजार कर रहे हैं। किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है, “फसल डूब गई, घर के सामने पानी है, पशुओं के लिए चारा नहीं है… अब खाएंगे क्या?” गीतों में बाढ़ पीड़ितों का दर्द बाढ़ की त्रासदी ने ग्रामीणों को गहराई से प्रभावित किया है। धनघटा क्षेत्र के रहने वाले सूबेदार सिंह यादव ने गीतों के जरिए बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को आवाज दी। उनके गीतों में डूबती फसल, टूटती उम्मीद और सरकारी मदद के इंतजार का दर्द सामने आता है। जल निकासी की व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल ग्राम प्रधान बालेंद्र कुमार के साथ राजाराम, लालमन, लालचंद, दीनदयाल, ओमकार और सीताराम समेत ग्रामीणों ने क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नदी का पानी घटने के बाद भी गांवों और घरों के सामने जमा पानी धीरे-धीरे ही नदी की ओर जा पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कम्हरिया घाट के पास जल निकासी के लिए बनी पुलिया को बंद कर दिया गया। इससे बाढ़ का पानी इस रास्ते से नदी में नहीं जा पा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, इसी वजह से चकदहा, भौवापार और गुनवतिया गांवों में कई जगह अब भी पानी जमा है। पशुओं के लिए चारा भी नहीं बचा बाढ़ से किसानों के साथ पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। खेतों में पानी भरने से हरा चारा नष्ट हो गया है। पशुओं के लिए भूसा भी पर्याप्त नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो बची-खुची फसल के साथ पशुधन पर भी संकट गहरा सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User