गलत जानकारी दी तो होगी जेल! चुनाव आयोग सख्त
कर्नाटक में मतदाता सूची से जुड़े प्रपत्रों में गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ निर्वाचन आयोग ने सख्ती के निर्देश दिए हैं। जांच में गलत जानकारी या झूठी घोषणा साबित होने पर संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना, एक वर्ष तक की सजा या दोनों की कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों को प्रपत्र संख्या 6, 7 और 8 में मिली शिकायतों की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कर्नाटक | 2 अक्टूबर 2026
कर्नाटक में मतदाता सूची से जुड़े आवेदन पत्रों में जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ चुनाव अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा है कि शिकायतों की जांच के बाद गलत जानकारी या झूठी घोषणा साबित होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाए। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आवेदन पत्र में भी झूठी घोषणा पर एक वर्ष तक की सजा या जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान दर्ज है।
गलत जानकारी देने वालों पर होगी कार्रवाई
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मतदाता सूची से संबंधित आवेदन पत्रों में जानबूझकर गलत जानकारी देने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। यह निर्देश मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों के बाद दिया गया है। अधिकारियों को संदिग्ध आवेदन पत्रों की पूरी जांच करने के बाद ही आगे की कार्रवाई करने को कहा गया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रपत्र संख्या 6, किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति या नाम हटाने के लिए प्रपत्र संख्या 7 और मौजूदा मतदाता विवरण में सुधार या पता बदलने के लिए प्रपत्र संख्या 8 का इस्तेमाल किया जाता है। आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इन प्रपत्रों में दी गई घोषणा सत्य होना जरूरी है।
एक साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान
यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठी जानकारी या गलत घोषणा दी है, तो उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आधिकारिक प्रपत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी झूठी घोषणा के लिए एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसलिए मतदाता सूची से संबंधित कोई भी आवेदन भरते समय सही और सत्य जानकारी देना जरूरी है। निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि केवल शिकायत मिलने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ तुरंत कार्रवाई न की जाए। पहले आवेदन और उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
प्रपत्र संख्या 7 को लेकर बढ़ा विवाद
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में प्रपत्र संख्या 7 जमा किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। इस प्रपत्र का इस्तेमाल किसी मतदाता के नाम को मतदाता सूची से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार नाम हटाने के लिए दिए गए कारण को साबित करने की जिम्मेदारी आवेदन करने वाले व्यक्ति की होती है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रपत्र संख्या 7 के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायतों के बाद अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से न हटे। संदिग्ध या गैर-वास्तविक आवेदन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने लगाए थे आरोप
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग जानबूझकर प्रपत्र संख्या 7 का इस्तेमाल कर कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी बड़ी संख्या में प्रपत्र जमा किए जाने को लेकर निर्वाचन अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पुष्टि की जानी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने इस मुद्दे को लेकर कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने संबंधित अधिकारियों को झूठे दावों और आपत्तियों की जांच कर दोष साबित होने पर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है
मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी आवेदन भरते समय आवेदक को अपनी जानकारी और घोषणा पूरी सावधानी से भरनी चाहिए। नाम जुड़वाने, नाम हटाने या मतदाता विवरण में सुधार से संबंधित आवेदन में गलत तथ्य देने से कानूनी परेशानी हो सकती है। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार आवेदन में दी गई जानकारी की सत्यता की जिम्मेदारी आवेदक की होती है। कर्नाटक में जारी ताजा निर्देशों का उद्देश्य शिकायतों और संदिग्ध आवेदनों की जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। साथ ही अधिकारियों को वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और बिना उचित जांच के किसी का नाम हटाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु
- मतदाता सूची से जुड़े आवेदन में जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है।
- प्रपत्र संख्या 6 का उपयोग नए मतदाता के नाम के पंजीकरण के लिए होता है।
- प्रपत्र संख्या 7 का उपयोग नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति के लिए किया जाता है।
- प्रपत्र संख्या 8 का उपयोग मौजूदा मतदाता विवरण में सुधार या पता बदलने के लिए किया जाता है।
- झूठी घोषणा साबित होने पर एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
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