मस्क के बयान से रिलायंस को 39,718 करोड़ का झटका!
एलन मस्क की स्टारलिंक इंटरनेट सेवाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। आठ अक्टूबर को कंपनी के शेयर बीएसई पर 2.43 प्रतिशत और एनएसई पर 2.45 प्रतिशत तक टूट गए। इससे रिलायंस के बाजार मूल्यांकन में लगभग 39,718 करोड़ रुपये की कमी आई। मस्क ने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू करने में बाधाएं आने का आरोप लगाया, जबकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी कंपनियों को सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026
एलन मस्क और स्टारलिंक से जुड़े विवाद के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के कारण कंपनी के बाजार मूल्यांकन में करीब 39,718 करोड़ रुपये की कमी आई। मस्क की टिप्पणी के बाद उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
रिलायंस के शेयरों में कितनी गिरावट आई
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आठ अक्टूबर, गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी का शेयर 2.43 प्रतिशत गिरकर 1,177.30 रुपये पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इसमें 2.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और शेयर 1,178 रुपये पर आ गया।शेयरों में आई इस गिरावट का सीधा असर कंपनी के बाजार मूल्यांकन पर पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन लगभग 39,718 करोड़ रुपये घटकर 15,93,185.78 करोड़ रुपये रह गया। इस घटनाक्रम ने निवेशकों का ध्यान कंपनी के शेयरों और दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर खींचा।
एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए
स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में अपनी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह स्टारलिंक की सेवाओं के विस्तार में बाधाएं पैदा कर सकते हैं। मस्क के अनुसार, ऐसी परिस्थितियां बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती हैं और नई कंपनियों के लिए अवसर सीमित कर सकती हैं।मस्क की टिप्पणियों के केंद्र में भारत का उपग्रह इंटरनेट बाजार और उसमें विभिन्न कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का मुद्दा रहा। स्टारलिंक दुनिया के कई देशों में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है और भारतीय बाजार में भी विस्तार की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, भारत में सेवाएं देने के लिए संबंधित सरकारी मंजूरियों और निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
मस्क ने अंबानी को लेकर क्या कहा
शेयर बाजार में कारोबार समाप्त होने के बाद एलन मस्क ने सामाजिक माध्यम एक्स पर एक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अंबानी भारत के असली मालिक हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और स्टारलिंक से जुड़े विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इस बयान को भारत के इंटरनेट और दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा गया।मस्क ने यह भी दावा किया कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में सेवाएं देने के लिए लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी ने भारत में भी सरकारी नियमों का पालन किया है। हालांकि, किसी कंपनी को दूसरे देशों में मिली अनुमति अपने आप भारत में सेवाएं शुरू करने का अधिकार नहीं देती। भारतीय बाजार में परिचालन के लिए देश के लागू कानूनों और सुरक्षा संबंधी शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
भारत सरकार का क्या रुख है
भारत सरकार ने उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी सुरक्षा आवश्यकताओं पर अपना रुख स्पष्ट किया है। सरकार के अनुसार, देश में सेवाएं देने वाली सभी कंपनियों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इन शर्तों का उद्देश्य दूरसंचार व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।इस मामले में कारोबारी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सरकारी मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रियाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। स्टारलिंक और अन्य इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के लिए भारतीय बाजार में विस्तार का रास्ता इन्हीं शर्तों से होकर गुजरता है। ऐसे में विवाद का असर केवल कंपनियों के बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में उपग्रह इंटरनेट सेवाओं के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 22,231.80 पर आ गया।बाजार में कमजोर रुख के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के अलावा दूरसंचार क्षेत्र की अन्य कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। वोडाफोन आइडिया के शेयर में 3.03 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि भारती एयरटेल का शेयर करीब दो प्रतिशत टूट गया। हालांकि, रिलायंस के शेयरों में आई गिरावट को केवल मस्क के बयान का परिणाम मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि बाजार में व्यापक बिकवाली और दूसरे कारोबारी कारक भी शेयरों की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैंरिलायंस इंडस्ट्रीज भारत के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल है और उसके शेयरों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ सकता है। कंपनी के शेयरों में गिरावट के साथ बाजार मूल्यांकन में आई कमी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। इसके साथ ही उपग्रह इंटरनेट सेवाओं को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने दूरसंचार क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा तेज कर दी है।हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी सार्वजनिक बयान और शेयर की कीमत में एक साथ बदलाव होने से दोनों के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध साबित नहीं होता। शेयर बाजार पर कंपनी के वित्तीय नतीजों, आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की धारणा और वैश्विक घटनाक्रमों का भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए निवेश से जुड़े निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित तथ्यों का आकलन करना आवश्यक है।
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