एयर चीफ मार्शल बोले- तेजस की डिलीवरी में देरी नुकसानदायक:वायुसेना को हर साल 36-40 फाइटर जेट चाहिए; फाइटर जेट स्क्वॉड्रन घटकर 29 हुई

Oct 03, 2026 - 19:16
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एयर चीफ मार्शल बोले- तेजस की डिलीवरी में देरी नुकसानदायक:वायुसेना को हर साल 36-40 फाइटर जेट चाहिए; फाइटर जेट स्क्वॉड्रन घटकर 29 हुई
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को कहा कि तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही देरी से भारतीय वायुसेना को नुकसान हो रहा है। मौजूदा हालात में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हवाई ताकत बहुत जरूरी होती जा रही है और वायुसेना के पास फाइटर जेट स्क्वाड्रन की संख्या कम हो रही है। एयर चीफ ने कहा कि वायुसेना को अगले कुछ साल हर साल कम से कम 36-40 फाइटर जेट चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि तेजस मार्क-1A और फ्रांस से लिए जाने वाले राफेल जेट की आपूर्ति से स्थिति सुधरेगी। वायुसेना इन विमानों को शामिल करना चाहती है, क्योंकि उसके फाइटर जेट स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है। वायुसेना के फाइटर स्क्वॉड्रन की आधिकारिक मंजूर संख्या 42 है। 114 राफेल की पेंडिग डील फरवरी में मंजूरी मिली एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारत मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) डील को इसी वित्त वर्ष में अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि योजना के मुताबिक काम हुआ, तो ऐसा संभव है। फरवरी में भारत ने 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की लंबित योजना को मंजूरी दी थी। यह खरीद फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार समझौते के तहत होगी। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा खरीद अभियान है। वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए यह योजना करीब दो दशक पहले शुरू की गई थी। एयर चीफ ने कहा, “अगर चीजें ठीक रहीं, तो हमें इस वित्त वर्ष में इसे (MRFA डील) साइन कर लेना चाहिए। यही मेरी उम्मीद है। लेकिन यह दोतरफा प्रक्रिया है।” तेजस मार्क-1A की डील से अब तक का अपडेट एयर चीफ मार्शल ने कहा कि वायुसेना तेजस मार्क-1A, MRFA के तहत मिलने वाले विमानों, तेजस मार्क-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लड़ाकू विमानों का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर AMCA कार्यक्रम में देरी होती है, तो वायुसेना को किसी दूसरे प्लेटफॉर्म की खरीद पर भी विचार करना पड़ सकता है। रूस ने Su-57 विमानों की पेशकश की है, लेकिन इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटर कमांड पर नई चर्चा प्रस्तावित थिएटराइजेशन योजना पर एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस पर नए नजरिए से विचार किया जा रहा है। मार्शल बोले- “मैंने साफ किया है कि भारतीय वायुसेना थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है। हम इसकी दिशा में काम कर रहे हैं और शुरुआत से ही चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं।” एयर चीफ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटराइजेशन योजना पर चर्चा ने “थोड़ी अलग दिशा” ले ली है। उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें सीधे अनुभव मिले।” सरकार ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए 2019 में थिएटराइजेशन योजना का ऐलान किया था। हालांकि, इस पर अब तक कोई स्पष्ट प्रगति नहीं हुई है। इस मॉडल के तहत सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को एक साथ जोड़ा जाएगा। युद्ध और अभियानों में उनके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा। एयर चीफ ने कहा कि सरकार तय करेगी कि थिएटराइजेशन के लिए किस तरह का संगठन बनाया जाए। यह भी तय होगा कि इसे किस क्रम में बनाया जाए और एक साथ लागू किया जाए या धीरे-धीरे। उन्होंने कहा, “जब हम सरकार के सामने उपलब्ध विकल्प रखेंगे, तब मुझे पूरा भरोसा है कि इन फैसलों पर सरकार ही निर्णय लेगी।” उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। थिएटराइजेशन योजना के तहत हर थिएटर कमांड में सेना, नौसेना और वायुसेना की इकाइयां होंगी। ये सभी एक ही इकाई के रूप में काम करेंगी और किसी तय भौगोलिक क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों को संभालेंगी। फिलहाल सेना, नौसेना और वायुसेना की अलग-अलग कमांड हैं। एयर पावर और AI पर जोर एयर चीफ मार्शल सिंह ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में एयर पावर की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी एयर पावर और मजबूत करने की जरूरत है। वायुसेना के आधुनिकीकरण पर उन्होंने कहा कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाना होगा। हालांकि, अहम फैसले इंसान ही लेते रहेंगे। उन्होंने कहा, “हमें AI से मजबूत वायुसेना बनानी होगी।

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