गांधी बाग में क्रांति गाथा दिखाएगा लाइट एंड साउंड शो:ट्रायल जारी, छावनी परिषद के सीईओ से वार्ता के बाद तय होगी तारीख
1857 की क्रांति की गाथा और क्रांतिकारियों के साहस को अब रोशनी, आवाज और आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत तरीके से दिखाया जाएगा। इसके लिए गांधी बाग में लाइट एंड साउंड शो तैयार हो गया है। फिलहाल इसका ट्रायल चल रहा है। पहले इसका शुभारंभ 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर होना था। अब दो-तीन दिन में ट्रायल पूरा होने के बाद इसके शुभारंभ की तैयारी है। इस शो के जरिए लोग 1857 की क्रांति से जुड़ी घटनाओं, क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके साहस को नए अंदाज में देख और सुन सकेंगे। इसमें आधुनिक लाइटों, लेजर और थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग का इस्तेमाल किया गया है। रोशनी, संगीत, संवाद और दमदार आवाज के जरिए क्रांति की कहानी को इस तरह प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दर्शकों को घटनाएं जीवंत होती हुई महसूस होंगी। मेडा ने अवस्थापना निधि से कराया निर्माण लाइट एंड साउंड शो का निर्माण मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने अवस्थापना निधि से कराया है। इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी कार्यदायी कंपनी के पास पांच साल तक रहेगी। वहीं, छावनी परिषद की ओर से रखरखाव के लिए सामान्य शुल्क लिया जाएगा। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने बताया कि शो की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और फिलहाल ट्रायल किया जा रहा है। जल्द ही छावनी परिषद के सीईओ से वार्ता करके इसके शुभारंभ की तारीख तय की जाएगी। इसके बाद लोगों को गांधी बाग में 1857 की क्रांति की कहानी रोशनी और आवाज के माध्यम से देखने का मौका मिलेगा। ऐसे दिखाई जाएगी क्रांति की गाथा लाइट एंड साउंड शो में आधुनिक लाइटों, लेजर और थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग की मदद से दीवार या किसी अन्य सतह पर चित्र उकेरे जाते हैं। इसके साथ एक तय स्क्रिप्ट के अनुसार आवाज, संगीत और डायलॉग चलाए जाते हैं। रोशनी और ध्वनि के तालमेल से कहानी को इस तरह पेश किया जाता है कि दर्शक घटनाओं को केवल सुनते नहीं, बल्कि उन्हें अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए भी महसूस कर सकें। गांधी बाग में तैयार यह शो मेरठ की 1857 की क्रांति से जुड़ी विरासत को लोगों तक पहुंचाने का एक नया माध्यम बनेगा।
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