गांधी भवन में मुशायरा व कवि सम्मेलन:गीत, गजल और कौमी एकता के पैगाम ने मोहा श्रोताओं का मन
देवा रोड स्थित गांधी भवन में शुक्रवार की रात 49वें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह ‘गोप’ ने किया। इस साहित्यिक महफिल में गीत, ग़ज़ल, शेर-ओ-शायरी, व्यंग्य और कौमी एकता के संदेशों ने देर रात तक श्रोताओं को अपनी जगह से बांधे रखा। मशहूर शायर फैज खुमार बाराबंकवी के शानदार संचालन में सजी इस महफिल का आगाज लोकेश त्रिपाठी की उम्मीद जगाती काव्य पंक्तियों से हुआ। डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने अपनी बेहतरीन रचनाओं से जमकर तालियां बटोरीं। लखनऊ से आए शायर असद उमर ‘असद’ ने समाज में रिश्तों की बदलती तस्वीर को अपने शेरों में खूबसूरती से ढाला। वहीं, कवि अशोक टाटम्बरी ने कौमी एकता का मजबूत संदेश देते हुए कहा कि 'आजाद संग हमीद तो समझो बसंत है।' इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के साहित्य व कला प्रेमी उपस्थित रहे और देर रात तक शेरों-सुखन का लुत्फ उठाया। इस महफिल ने समाज को यह गहरा पैगाम दिया कि शब्द भले ही अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मोहब्बत और इंसानियत की जुबान हमेशा एक ही होती है।
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