घाटमपुर में 40 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार:सूरत से आता आंखों का कपड़ा, चेहरा है आकर्षण का केंद्र; 25 दिन बनाने में लगे

Oct 20, 2026 - 11:42
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घाटमपुर में 40 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार:सूरत से आता आंखों का कपड़ा, चेहरा है आकर्षण का केंद्र; 25 दिन बनाने में लगे
कानपुर के घाटमपुर एक परिवार दो पीढ़ियों से रावण के पुतले को बनाकर परंपरा का निर्वाहन कर रहा है। यहां पर रावण के पुतले को तैयार करने में 25 दिन का समय लगता है। साठ हजार रुपए की लागत से 40 फुट ऊंचा पुतला बनाया जाता है। रावण के पुतले का चेहरा लोगों में आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यूपी में ऐसा चेहरा कहीं नहीं बनाया जाता है। पुतले का चेहरा हुबहू आदमी के चेहरे जैसा लगता है। आंख की पुतली के लिए सूरत से कपड़ा मंगाया जाता है। रावण के पुतले को तैयार करने में हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग सहयोग करते हैं। यह पुतला घाटमपुर क्षेत्र में हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश देता है। दो पीढ़ियों से परिवार बना रहा रहा रावण का पुतला, ग्रामीण देते श्रमदान घाटमपुर तहसील क्षेत्र के पतारा कस्बा निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से बुजुर्ग रावण का पुतला तैयार करते थे, जब वह छोटे थे तो बचपन में वह भी अपने दादा और पिता जी को रावण का पुतला बनाते देखते थे, धीरे धीरे उनकी रूचि भी रावण के पुतले को तैयार करने में लगने लगी। वह बचपन में छोटा सा रावण का पुतला बनाया करते थे, जिसके बाद से वह वह बड़े हुए और रावण का पुतला बनाकर बुजुर्गो द्वारा बनाई गई परम्परा का निर्वाहन करने लगे। इसमें उनके भाई सुधाकर सिंह के साथ गांव के लोग भी पारिश्रमिक सहयोग करते है। आंखों के लिए सूरत से आता कपड़ा संजय सिंह ने बताया की चेहरे को बनाने के लिए पहले बास की लकड़ी को पानी में भिगोया जाता है, जिसे एक दिन बाद पानी से बहार निकालकर चेहरे नुआ आकृति बनाई जाती है। उसके ऊपर साड़ी से सिलाई की जाती है, चेहरा समतल करने के लिए अखबार, तख्ती, फोम आदि का प्रयोग किया जाता है, उसके ऊपर कलर पेंट लगाया जाता है। सूखने के बाद चेहरे की आकृति बनकर तैयार हो जाती है। आंखों को बनाने के लिए सूरत से कपड़ा मंगाया जाता है। जिससे आंखों की पुतली बनाई जाती है। जो देखने में बिल्कुल आंख जैसी लगती है। रावण का मुकुट बनाता मुस्लिम परिवार संजय सिंह ने बताया की रावण के पुतले को बनाने में हिंदू मुस्लिम दोनो समुदाय के लोग सहयोग करते है, यहां पर रावण का मुकुट बनाने में कस्बा निवासी कासिम का सहयोग रहता है, यह रावण का पुतला क्षेत्र में हिंदू मुस्लिम एकता को दर्शाता है। कासिम ने बताया की रावण के मुकुट को बनाने में लगभग 45 झालर लगती है। मुकुट को तैयार करने में कलर शीट, प्रिंटेड शीट आदि का प्रयोग किया जाता है। वह कई वर्षों से रावण के मुकुट को बनाने का काम कर रहे है। दो दिन ने जूते बनकर होते तैयार रावण का पुतला बनाने वाले संजय सिंह ने बताया की रावण के पुतले के जूते में लगभग सात झालर लाइट लगाई जाती है, जिसे तैयार करने में लगभग दो दिन का समय लगता है, तीन फूट के जूते झालरों की लाइट से जगमगा उठते है, यहां पर जूतों में कलर शीट के साथ कलर पेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है। पुतला बनाने में लागत साठ हजार रुपए संजय सिंह बताते हैं वह रावण के चेहरे को तैयार करते है। उनके भाई सुधाकर सिंह रावण के पुतले को बनाते है। सुधाकर सिंह ने बताया कि वह अपने सहयोगी महिपाल सिंह, हर्षू तिवारी, भोलू गुप्ता, अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर रावण के 40 फूट ऊंचे पुतले को बनाते है। उन्होंने बताया की रावण के पुतले को तैयार करने के लिए वह अपने सहयोगियों के साथ दिन रात लगते हैं। इसके बाद यह पुतला बनकर तैयार होता है। रावण का पुतला बनाने में लगभग साठ हजार रुपए का खर्च आता है, जिसे वह लोग वाहन करते है। शाम को मेला लगता है, रामलीला का मंचन होने के साथ रावण के पुतले का दहन होता है। जिसमे भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। क्रेन की मदद से रक्खा जाता चेहरा शाम को होगा मेले का अयोजन रावण का पुतला बनाने वाले संजय सिंह और सुधाकर सिंह ने बताया कि क्रेन की मदद से रावण का चेहरा रक्खा जाएगा, जिसके बाद पुतला तैयार हो गया। यहां पर मैदान में शाम को मेला का अयोजन किया जाता है, रात में रामलीला होने के साथ भगवान श्री राम के द्धारा धनुष बाण से रावण का वध किया जाता है। तब रावण का पुतला दहन होता है इस दौरान यहां पर आसपास गावों से लोगों की भारी भीड़ जुटती है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी मौजूद रहता है।

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