घाटमपुर में मां कूष्मांडा के दर्शन को उमड़े भक्त:मंदिर में सुबह से लगी कतारें, शाम को एक लाख दीपों से जगमगाएगा परिसर

Oct 14, 2026 - 12:22
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घाटमपुर में मां कूष्मांडा के दर्शन को उमड़े भक्त:मंदिर में सुबह से लगी कतारें, शाम को एक लाख दीपों से जगमगाएगा परिसर
घाटमपुर में नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा देवी के दर्शन-पूजन के लिए सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। करीब एक हजार साल पुराने इस शक्तिपीठ में श्रद्धालु मिठाई, नारियल और चुनरी चढ़ाकर मां से सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। शाम को मंदिर में दीपदान कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए परिसर को एलईडी लाइटों से सजाया गया है। आयोजन के दौरान एक लाख दीप जलाने की तैयारी है। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। करीब एक हजार साल पुराना है शक्तिपीठ घाटमपुर नगर में स्थित मां कूष्मांडा देवी मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिर में भक्त दर्शन के साथ मुंडन और जनेऊ जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी कराते हैं। मान्यता है कि यहां कई वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है। गाय के दूध से जुड़ी है मंदिर की मान्यता स्थानीय मान्यता के मुताबिक, करीब एक हजार साल पहले कुड़हा नाम का ग्वाला इस स्थान पर गाय चराता था। उसकी गाय एक जगह खड़ी होकर अपने आप दूध गिरा देती थी। बाद में वहां खुदाई की गई तो मां की पिंडी निकली। मान्यता के अनुसार, ग्वाले के नाम से ही मां का नाम कूष्मांडा पड़ा। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित पिंडी से लगातार जल रिसने की बात भी कही जाती है। मंदिर के निर्माण से जुड़ा इतिहास इतिहासकारों के मुताबिक, राजा घाटमपुर दर्शन ने वर्ष 1380 में मंदिर की नींव रखी थी। उनके नाम पर ही नगर का नाम घाटमपुर पड़ा। बाद में नगर निवासी चंदीदीन भुर्जी ने वर्ष 1890 में मंदिर का निर्माण कराया। इतिहासकारों के अनुसार, मराठा शैली में बने इस मंदिर की मूर्तियां संभवतः दसवीं शताब्दी के मध्य की हैं। भदरस गांव के कवि उम्मेदराय खरे ने वर्ष 1783 में फारसी भाषा में ऐश आफ्जा नाम की पांडुलिपि लिखी थी। इसमें मां कूष्मांडा और भदरस की मां भद्रकाली का वर्णन मिलता है। शाम को एक लाख दीप जलाने की तैयारी दीपदान कार्यक्रम के लिए मंदिर परिसर में तैयारियां चल रही हैं। एलईडी लाइटों से सजावट की गई है। आयोजकों की तैयारी के मुताबिक, शाम को एक लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगाएगा और इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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