GIS से होगी GDA के संपत्तियों की निगरानी:अतिक्रमण की स्थिति की समय से मिल सकेगी जानकारी

Sep 24, 2026 - 22:56
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GIS से होगी GDA के संपत्तियों की निगरानी:अतिक्रमण की स्थिति की समय से मिल सकेगी जानकारी
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) अपनी जमीन, संपत्तियों और शहरी विकास से जुड़े कार्यों की निगरानी भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के माध्यम से करेगा। इसके जरिए प्राधिकरण की जमीन की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। यदि वहां कोई अतिक्रमण करने का प्रयास करेगा तो समय से उसकी जानकारी भी मिल जाएगी। जिसके बाद समय रहते अतिक्रमण हटाया जा सकेगा। इस व्यवस्था से प्राधिकरण की संपत्तियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा। किसी भवन के लिए मानचित्र की स्वीकृति और निर्माण की स्थिति की निगरानी भी होगी। शहरी परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी भी जुटाई जा सकेगी। नई व्यवस्था के तहत GIS आधारित एसेट, भूमि एवं शहरी प्रबंधन प्लेटफार्म विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें GDA के विभिन्न अनुभागों और प्रस्तावितर ईआरपी (एकीकृत प्रबंधन प्रणाली) को आपस में जोड़ा जाएगा। व्यवस्था लागू होने पर GDA की जमीन और संपत्तियों की लोकेशन आधारित जानकारी एक ही प्लेटफार्म पर मिल सकेगी। ऐसे काम करेगी नई प्रणाली प्रस्तावित GIS प्लेटफार्म पर GDA की जमीन, भवनों और दूसरी परिसंपत्तियों की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। हर संपत्ति का लोकेशन आधारित रिकार्ड तैयार होगा। इसे प्रस्तावित इआरपी के डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जिससे अलग-अलग अनुभागों में उपलब्ध सूचनाओं को एक जगह एकीकृत किया जा सके। जमीन की स्थिति में बदलाव या संभावित अतिक्रमण की पहचान के साथ अलर्ट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। भवन निर्माण से जुड़े मामलों में एनालिटिक्स के माध्यम से स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित मानकों के अनुपालन की निगरानी की जा सकेगी। इससे मौके की स्थिति और अभिलेखों में दर्ज जानकारी के बीच अंतर पकड़ने में मदद मिलेगी। GDA की विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के लिए वर्कफ्लो और प्रोजेक्ट मानिटरिंग सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव है। वहीं, एआइ आधारित अर्बन ग्रोथ एनालिटिक्स के जरिये शहर के संभावित विस्तार और भविष्य में लैंड बैंक की जरूरत का आकलन किया जाएगा। इससे आगे की भूमि योजना तैयार करने में मदद मिलेगी। GDA के रिकार्ड रूम में रखे पुराने निर्माण संबंधी अभिलेख, मानचित्र, योजनाएं और संपत्ति फाइलों को भी सुरक्षित किया जाएगा। इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और डिजिटलीकरण के लिए इंटैक कंजर्वेशन इंस्टीट्यूट के साथ एमओयू की तैयारी है।

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