गंगा में गिर रहा विशाल नाला, NGT की सख्ती बेअसर:सूजाबाद-डोमरी वार्ड में बनाया गया, लोग बोले- कैसे साफ और स्वच्छ होगी गंगा

Oct 14, 2026 - 08:46
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गंगा में गिर रहा विशाल नाला, NGT की सख्ती बेअसर:सूजाबाद-डोमरी वार्ड में बनाया गया, लोग बोले- कैसे साफ और स्वच्छ होगी गंगा
वाराणसी में गंगा में गिरने वाले नालों को टैप किए जाने की कवायद सरकार ने की और दावा है की गंगा में कोई नाला नहीं गिरता और सब एसटीपी जाता है। इस दावे की पोल कुछ दिनों पहले शाही नाला ( नमो घाट) ने खोली थी। जिसे गंगा प्रदूषण बोर्ड ने बंद करवाया था। वह भी लगातार गंगा में गिर रहा है और सीवर के पानी के साथ मलजल ले जा रहा। वहीं ठीक इसके सामने गंगा के उसपर सूजाबाद-डोमरी वार्ड में भी एक विशाल नाला जिसे 6 महीने पहले ही व्यवस्थित किया गया है। सीधे गंगा में गिर रहा है। जिससे गंगा को प्रदूषण से रोकने और नियम और NGT के निर्देशों की धज्जियां उड़ रही है। स्थानीय लोगों ने कहा- 6 महीने पहले ही इस नाले को सही किया गया है और दोनों तरफ पत्थर लगाकर इसकी मेड़बंदी बाढ़ के पहले की गयी की यह बाह न जाए और नाला सुचारू रूप से चले। सूजाबाद क्षेत्र पहले ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। और काशी विद्यापीठ ब्लॉक का अभिन्न अंग था। लेकिन अब इसे नगर निगम का हिस्सा बना दिया गया है। स्थानीय जनता को उम्मीद थी कि नगर निगम में शामिल होने के बाद उनके इलाके की सूरत बदलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। ऐसे में दैनिक भास्कर ने वाराणसी के सूजाबाद-डोमरी वार्ड से गंगा में बह रहे इस नाले की पड़ताल की और लोगों से जाना की आखिर कब से यह नाला यहां अनवरत बह रहा है। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिये तीन तस्वीरें… अब जानिए ग्रामीणों ने क्या कहा… वर्षों से बह रहा, बंद करने की जगह हुई मरम्मत सूजाबाद के स्थानीय निवासी सोहनलाल साहनी ने बताया - वर्षों पहले जब से यह नाला शुरू हुआ है, तब से लेकर आज तक इसका गंदा और दूषित पानी सीधे गंगा जी में मिल रहा है। सूजाबाद का नगर निगम में विलय तो हो गया, लेकिन इस क्षेत्र का विकास कहीं से भी और किसी भी रूप में दिखाई नहीं देता सोहनलाल ने आगे कहा यह नाला बंद होना चाहिए था पर 6 महीने पहले इसकी मरम्मत कर दी गयी और इसकी बाउंड्री बनाई गयी ताकि बाढ़ में इसे नुकसान न पहुंचे। सरकार और प्रशासन द्वारा गंगा को स्वच्छ रखने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार ने इस नाले के पानी को फिल्टर करने या मोड़ने के लिए कोई ठोस और पुख्ता सिस्टम अब तक तैयार नहीं किया है। आस्था पर दोहरी मार, गंगा में विसर्जन बंद, पर नाला बह रहा सोहनलाल सहानी ने कहा - जब त्योहारों के समय वे अपनी धार्मिक मूर्तियों का विसर्जन गंगा जी में करना चाहते हैं। तो प्रशासन द्वारा प्रदूषण का हवाला देकर उन्हें रोक दिया जाता है। लोगों को अपनी पवित्र मूर्तियों को नालों या कृत्रिम तालाबों में विसर्जित करने के लिए मजबूर किया जाता है। हमारी मूर्तियों के लिए तो कहा जाता है कि इससे गंगा प्रदूषित होती है और उन्हें तालाब में विसर्जित करने के लिए मजबूर किया जाता है। लेकिन दूसरी तरफ इस नाले के माध्यम से पूरी सीवर लाइन और शौचालय का गंदा पानी चौबीसों घंटे सीधे गंगा जी में बहाया जा रहा है। इस गंदे पानी को रोकने के लिए प्रशासन कोई कदम क्यों नहीं उठाता?" नगर निगम में शामिल पर विकास शून्य स्थानीय सुजीत साहनी ने बताया - नगर निगम में शामिल होने के बाद विकास की गति तेज होनी चाहिए थी। लेकिन यहां तो सब कुछ ठप पड़ा है। जो पार्षद चुनकर आये हैं। वे पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। सूजाबाद के अंदर जो सार्वजनिक स्थान हैं। वहां विकास का कोई काम ही नहीं हो रहा है। नगर निगम का बोर्ड लग जाने से पेट नहीं भरता, धरातल पर काम होना चाहिए जो कि पूरी तरह गायब है। बढ़ रहा बीमारियों का खतरा, स्थानीय लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी सुजीत सहानी ने बताया - इस गंदे नाले के खुले होने और सीवर का पानी लगातार बहने के कारण सुजाबाद और आसपास के इलाकों में भयंकर बदबू फैली रहती है। मच्छरों का प्रकोप चरम पर है। जिससे मलेरिया, डेंगू और टायफाइड जैसी घातक बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। सरकार को सब पता है लेकिन वो देख रही है या नहीं देख रही है। ये बात सरकार जाने। समस्या तो है ही। फरवरी 2026 में NGT ने लगाईं थी फाटकार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 9 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में अनुपचारित (Untreated) सीवेज और कारखानों से निकलने वाले गंदे पानी के बहाव पर कड़ी नाराजगी जताई थी। एनजीटी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार समेत सभी संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि गंगा में गिरने वाले चंदौली और वाराणसी में 76 में से 31 टैप नहीं किये गए हैं। एनजीटी ने स्टॉर्म वाटर ड्रेनों और गंगा की सहायक नदी अस्सी की अवैध टैपिंग को पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन बताया था। ट्रिब्यूनल की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कार्य योजना में सामने आया कि वाराणसी और चंदौली जिलों में कुल 76 नाले गंगा और वरुणा नदियों में गिरते हैं। इनमें से 31 नाले अभी तक पूरी तरह टैप नहीं किए गए हैं। जिससे बड़ी मात्रा में अनट्रीटेड सीवेज सीधे नदियों में पहुंच रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यह भी पाया कि वाराणसी में गंगा की सहायक नदी अस्सी को नाला मानकर टैप किया गया है। जो गंगा नदी (पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 का सीधे तौर पर उल्लंघन है।

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