गोद में बच्ची को लेकर शातिर मुस्कान ने दी दुहाई:दो बार कोर्ट में आकर रोयी, फैसले को प्रभावित करने का हर प्रयास हुआ विफल

Oct 14, 2026 - 23:36
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गोद में बच्ची को लेकर शातिर मुस्कान ने दी दुहाई:दो बार कोर्ट में आकर रोयी, फैसले को प्रभावित करने का हर प्रयास हुआ विफल
मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी करार दिए गए मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अदालत से लेकर जेल तक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। सजा सुनाए जाने से पहले दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दो बार जिला जज के सामने पेश किया गया। सुबह 10:30 बजे शुरु हुई सुनवाई में मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देकर भावनात्मक अपील की। गोद में एक साल की बच्ची को लेकर अदालत के सामने पहुंची मुस्कान ने अनुरोध किया कि सजा तय करते समय बच्चियों के भविष्य का भी ध्यान रखा जाए। शाम को फिर अदालत के सामने आए दोनों सुबह की कार्यवाही के बाद सजा सुनाए जाने से पहले शाम को मुस्कान और साहिल को फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत के सामने पेश किया गया। इस दौरान मुस्कान की आंखों में आंसू थे और इस बार भी बच्ची उसकी गोद में थी। फर्क इतना था कि माहौल पूरी तरह बदल चुका था। दोनों बैरकों में बढ़ाई गई निगरानी कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद साहिल और मुस्कान को उनकी बैरकों में वापस ले जाया गया। जेल प्रशासन ने उन्हें उनकी बैरकों में कड़ी निगरानी के बीच रखा। मृत्युदंड की घोषणा के बाद जेल परिसर में इस मामले को लेकर हलचल बढ़ गई और अधिकारियों ने आगे की व्यवस्था पर चर्चा शुरू कर दी। काफी देर तक दोनों के पास बंदियों का जमावड़ा लगा रहा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बुलाई आपात बैठक सजा सुनाए जाने के बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने आपात बैठक बुलाई। बैठक में मुस्कान और साहिल से संबंधित जेल व्यवस्था तथा मृत्युदंड के बाद जेल मैनुअल के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर मंथन किया। जेल प्रशासन के सामने अब दोनों की निगरानी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। सदमे में साहिल मुस्कान, पसरा सन्नाटा जेल सूत्रों के मुताबिक, फैसले के बाद दोनों की बैरकों में सन्नाटा पसरा रहा। दोनों गहरे सदमे में बताए गए और अन्य बंदियों से दूरी बनाए रहे। हालांकि, जेल में उनकी मानसिक स्थिति को लेकर किसी आधिकारिक चिकित्सकीय आकलन की जानकारी सामने नहीं आई है। यह होगी अब आगे की प्रक्रिया वरिष्ठ अधिवक्ता वीके शर्मा बताते हैं कि मृत्युदंड का फैसला आने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में दोषियों को कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में अपील और अन्य उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अवसर मिलता है। मृत्युदंड पर अमल से पहले संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और आवश्यक मंजूरियां पूरी होना जरूरी है।

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