गोंडा में घाघरा नदी ने तेज जी कटान:अस्थाई फूस के मकान जद में, 10 गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित
गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर आज मंगलवार सुबह 8 बजे खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। हालांकि तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के 10 गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इन गांवों में ब्योन्दा माझा, दत्तनगर और नकहरा शामिल हैं। इन गांवों के चारों तरफ और अंदर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन ने लोगों के आने-जाने के लिए 50 से ज्यादा नावें लगाई हैं। एक तरफ जहां पानी कम होने से थोड़ी राहत है, वहीं दूसरी तरफ घाघरा और सरयू नदियों ने कटान तेज कर दी है। बीते 24 घंटे में नवाबगंज के निचले इलाके में 20 बीघा से ज्यादा फसल और जमीन नदी में समा गई है। तीन तस्वीरें देखिए बाणीमाझा, साखीपुर, चहलवा और बहादुरपुर गांव के किनारे बने कई अस्थाई फूस के मकान कटान के खतरे में हैं। जिला प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री और लंच पैकेट दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा अलग-अलग गांव में कैंप लगाकर के लोगों की जांच कर उन्हें दवाई उपलब्ध कराई जा रही है संक्रामक बीमारियों से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं। लंच पैकेट मिलने के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें कुछ काम हो रही है स्थानीय जनप्रतिनिधि भी बाढ़ राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं। गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि नदी कटान कर रही है और प्रभावित गांवों में सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। बाढ़ का पानी पूरी तरीके से अब खत्म हो रहा है कई गांव आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित है वहां पर लगातार हमारे कई टीम लगी हुई है। किसी प्रकार की दिक्कत लोगों को नहीं होने दी जाएगी नदी का जलस्तर अब एकदम घट जाएगा।
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