गोंडा में पितृ विसर्जन पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़:सुबह 9 बजे तक 10 हजार ने लगाई डुबकी, किया तर्पण-पिंडदान
गोंडा में पितृपक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार सुबह से ही प्रमुख नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 7 बजे से परसपुर के पौराणिक पसका संगम घाट और कर्नलगंज के सरयू कटरा घाट पर स्नान, तर्पण और पिंडदान का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह 9 बजे तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर अपने पितरों का तर्पण कर चुके थे। सरयू नदी के घाटों पर हर-हर गंगे के जयकारे और वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मान्यता के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों का तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। पसका संगम घाट पर जुटने लगे श्रद्धालु परसपुर विकासखंड के सूकरखेत पसका घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी जिलों से भी लोग स्नान और पितरों के तर्पण के लिए पहुंचे। पुरोहितों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने कुश, तिल, जौ और गंगाजल लेकर पूर्वजों का तर्पण किया। इसके बाद पिंडदान और पूजा-अर्चना की। कटरा घाट पर पिंडदान, ब्राह्मण भोज का संकल्प कर्नलगंज तहसील के सरयू कटरा घाट पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। लखनऊ-गोंडा मार्ग से नजदीक होने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं ने घाट की सीढ़ियों पर कतार में खड़े होकर स्नान किया और पितरों के निमित्त पिंडदान व ब्राह्मण भोज का संकल्प लिया। घाटों पर अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करने वालों की भी भीड़ रही।
गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने दोनों प्रमुख घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम किए। नदी में गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई और लाल झंडे लगाए गए। जल पुलिस, स्थानीय गोताखोरों और नावों को तैनात किया गया। घाटों और नदी में निगरानी के साथ प्रमुख मार्गों पर यातायात सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मी लगाए गए। स्नान के बाद दान, शाम तक दीपदान की तैयारी स्नान और तर्पण के बाद श्रद्धालुओं ने भिक्षुओं, जरूरतमंदों और पुरोहितों को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा दान कर पितरों की विदाई की कामना की। घाटों पर स्वच्छता और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था भी की गई। श्रद्धालुओं के मुताबिक, सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण और दान का विशेष महत्व है। शाम को दीपदान के साथ पितृपक्ष के अनुष्ठानों का समापन होगा।
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