गोंडा में रामलीला में हत्यारें को फांसी की सजा:ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा के मंचन को देखने के लिए 10 हजार लोग जुटे
गोंडा में सोमवार देर रात करीब 8 बजे अनोखी रामलीला का मंचन किया गया। यहां रामलीला के पारंपरिक प्रसंगों से अलग अदालत की कार्रवाई दिखाई गई। हत्या के मामले में गवाही हुई, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्य पेश किए गए। इसके बाद अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद युवक को प्रतीकात्मक रूप से फांसी के फंदे पर लटकाया गया। इस मंचन को देखने के लिए 10 हजार से अधिक लोग जुटे। कार्यक्रम करनैलगंज स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान का है। देखिए 3 तस्वीरें… काबुल से आए सौदागर के बेटे की हत्या की कहानी मंचन की कहानी में काबुल से एक सौदागर मेले में व्यापार करने आता है। इसी दौरान एक असामाजिक तत्व उसके बेटे की हत्या कर देता है। इसके बाद पुलिस जांच, गवाही और अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया दिखाई जाती है। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई जाती है। सजा के बाद आरोपी को मंच पर प्रतीकात्मक रूप से फांसी पर लटकाया जाता है। इस दृश्य को कलाकारों ने इतने जीवंत तरीके से प्रस्तुत किया कि दर्शक चौंक गए। मंचन के जरिए अपराध के दुष्परिणाम और न्यायिक प्रक्रिया को समझाने का प्रयास किया गया। ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपरा बताया जाता है कि करनैलगंज की रामलीला में इस तरह के मंचन की परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है। हर साल अपराध से जुड़ी किसी घटना को नाटकीय रूप में प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया जाता है। इस बार हत्या के मामले में आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने का दृश्य दिखाया गया। पिछले वर्ष चोरी के आरोप में एक युवक को प्रतीकात्मक रूप से फांसी दिए जाने का मंचन हुआ था। आसपास के जिलों से भी पहुंचे दर्शक इस अनोखी रामलीला को देखने के लिए गोंडा के अलावा पड़ोसी जिलों बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और बाराबंकी से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजकों के मुताबिक, मंचन का उद्देश्य लोगों को अपराध से दूर रहने और कानून के तहत मिलने वाली सजा के प्रति जागरूक करना है। कमेटी अध्यक्ष और मीडिया प्रभारी ने बताई वजह रामलीला कमेटी करनैलगंज के अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे ने बताया कि कमेटी हर साल अलग-अलग तरह के मंचन के जरिए समाज को अपराध के प्रति जागरूक करने का प्रयास करती है। इस वर्ष हत्या के मामले में आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कमेटी के मीडिया प्रभारी रितेश गुप्ता ने बताया कि अपराध में कमी लाने और लोगों को यह समझाने के लिए ऐसा मंचन किया जाता है कि अपराध करने पर किस तरह की कानूनी सजा मिल सकती है। उनका कहना है कि इस परंपरा के जरिए समाज को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
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