गोरखनाथ की तपस्या की इंद्र ने ली परीक्षा:असफल होने पर चरणों में रखा इंद्रासन और राजमुकुट; गुरु बोले- निष्काम तपस्या की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए

Oct 04, 2026 - 21:38
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गोरखनाथ की तपस्या की इंद्र ने ली परीक्षा:असफल होने पर चरणों में रखा इंद्रासन और राजमुकुट; गुरु बोले- निष्काम तपस्या की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए
संभल के पक्का बाग स्थित सिद्ध पीठ पातालेश्वर महादेव मंदिर में रविवार शाम 7 से रात 9 बजे तक भगवान श्री गोरखनाथ अमर गाथा का आयोजन हुआ। यह आयोजन तीसरे दिन हुआ। मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने भक्ति और आध्यात्मिक कथा का श्रवण किया। जनकल्याण के लिए तपस्या में लीन थे गोरखनाथ ‘श्री कल्कि पधारो धरती पर’ श्रृंखला के तहत शिव गोरख युवा वाहिनी सेवा दल ने कार्यक्रम कराया। आध्यात्मिक गुरु पं. राधेश्याम श्रीमाली ने भगवान श्री गोरखनाथ की कठोर तपस्या का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि गोरखनाथ जनकल्याण के उद्देश्य से तपस्या कर रहे थे। इंद्र ने तपस्या भंग करने के किए प्रयास कथा के अनुसार, देवराज इंद्र ने गोरखनाथ की तपस्या की परीक्षा लेने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने कई अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग किया। इसके बावजूद गोरखनाथ अपनी तपस्या से विचलित नहीं हुए। इंद्र के सभी प्रयास विफल हो गए। इंद्र ने चरणों में रखा राजपाट कथा के अनुसार, जब इंद्र को तीनों लोकों और चौदह भुवनों में कहीं शरण नहीं मिली तो वह गोरखनाथ की शरण में पहुंच गए। उन्होंने अपना राजपाट, इंद्रासन और राजमुकुट उनके चरणों में अर्पित कर दिया। इसके बाद स्वयं को शरणागत बताया। गोरखनाथ ने इंद्र को लौटाया राजपाट भगवान श्री गोरखनाथ ने कहा कि उन्होंने तपस्या इंद्रलोक का राज पाने के लिए नहीं की थी। उनकी तपस्या का उद्देश्य जनकल्याण था। इसके बाद उन्होंने इंद्र का राजपाट वापस लौटा दिया। उन्होंने संदेश दिया कि किसी भक्त की निष्काम तपस्या की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। दूसरों से पाने के बजाय देने की भावना जरूरी पं. राधेश्याम श्रीमाली ने कहा कि मानव जीवन में केवल दूसरों से पाने की लालसा नहीं होनी चाहिए। परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने और देने की भावना जरूरी है। यही सच्चा मानव धर्म और मानवता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद कार्यक्रम में डॉ. सुरेश सैनी, सूरज पाल यादव, कल्लू राम, जुगल किशोर मिश्रा, महंत ज्वालेश, सुशील कुमार योगी, नागेंद्र मोहन श्रीमाली, योगी देवाश मोहन श्रीमाली, आनंद सैनी, अनमोल सैनी, लक्ष्मण सैनी, जितेंद्र गुप्ता, गोपेश गुप्ता, कैलाश शर्मा, किशन आर्य, सुभाष आर्य, पप्पू सैनी, राकेश बाबू, विपिन आर्य, मनोज श्रीमाली, पार्थ शर्मा और रितिक भारद्वाज मौजूद रहे। महिला मंडल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

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