गोरखपुर में 1.25 लाख बच्चों से बदलेगी नदियों की सेहत:राप्ती में 75 हजार, सरयू में 50 हजार मछलियों का होगा स्टॉकिंग
गोरखपुर में प्रदेश की राज्य मछली चितला को बचाने और नदियों की बिगड़ती सेहत सुधारने के लिए बड़ा और असरदार अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का सबसे अहम केंद्र राप्ती और सरयू नदी को बनाया गया है, जहां कुल 1.25 लाख चितला मछली के बच्चे छोड़े जाएंगे। इसमें राप्ती नदी में 75 हजार और सरयू नदी में 50 हजार बच्चों का स्टॉकिंग किया जाएगा। दरअसल, मत्स्य विभाग ने इस बार राप्ती नदी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। 75 हजार चितला के बच्चों को छोड़ने का फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि यहां इस प्रजाति की संख्या तेजी से कम हुई है। बड़े पैमाने पर स्टॉकिंग से उम्मीद है कि आने वाले समय में राप्ती में चितला की अच्छी संख्या देखने को मिलेगी और नदी की प्राकृतिक सेहत सुधरेगी। तस्वीरें देखिए… सरयू में 50 हजार बच्चों से बढ़ेगी संख्या सरयू नदी में 50 हजार चितला के बच्चों को छोड़ा जाएगा। यह कदम सरयू के इकोसिस्टम को मजबूत करने में अहम साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी नदी में प्रमुख प्रजातियों की संख्या बढ़ती है तो उसका सीधा असर पूरे जैव संतुलन पर पड़ता है। इस बार अभियान की खास बात यह है कि करीब तीन इंच आकार के चितला के बच्चे कोलकाता से मंगाए जा रहे हैं। बड़े आकार के बच्चों को नदी में छोड़ने से उनका सर्वाइवल रेट काफी बढ़ जाता है, क्योंकि वे आसानी से अन्य मछलियों का शिकार नहीं बनते और तेजी से विकसित होते हैं। नदियों के इकोसिस्टम को मिलेगा नया जीवन विशेषज्ञों के अनुसार, चितला मछली नदियों के इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी संख्या बढ़ने से पानी की गुणवत्ता, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन बेहतर होता है। राप्ती और सरयू में एक साथ इतने बड़े स्तर पर स्टॉकिंग से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। इस अभियान का सीधा फायदा स्थानीय मछुआरों को भी मिलेगा। आने वाले समय में जब चितला की संख्या बढ़ेगी तो मछली उत्पादन में इजाफा होगा, जिससे मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी। यह योजना संरक्षण के साथ-साथ रोजगार को भी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरे मंडल में चलेगा अभियान
मत्स्य विभाग के अनुसार, राप्ती और सरयू से शुरू हुआ यह अभियान गोरखपुर मंडल की अन्य नदियों तक भी पहुंचेगा। कुशीनगर, महाराजगंज और देवरिया की नदियों में भी बड़े पैमाने पर चितला के बच्चे छोड़े जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक बार का अभियान नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। रिवर रैंचिंग के जरिए नदियों को फिर से जीवंत बनाने और घटती मछलियों की संख्या को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर यह अभियान सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में राप्ती और सरयू दोनों नदियों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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