गोरखपुर में हैली धूमकेतु के मलबे से उल्का वर्षा:रात में दिखेगा टूटते तारों का नजारा, हर घंटे 15-20 उल्काएं दिखने की उम्मीद
गोरखपुर के लोगों को बुधवार की रात आसमान में टूटते तारों जैसा खूबसूरत नजारा देखने का मौका मिल सकता है। 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर तक ओरियोनिड्स उल्का वर्षा देखने की संभावना है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में तेज गति से प्रवेश करने वाले धूल के छोटे-छोटे कण जलने के कारण आसमान में चमकती लकीरें बनाते हैं। आम भाषा में इन्हें टूटते तारे कहा जाता है। गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर और खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में उल्का वर्षा के चरम समय पर प्रति घंटे करीब 15 से 20 उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत नहीं है। शहर की तेज रोशनी से दूर किसी खुले स्थान से इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। आधी रात के बाद से भोर तक आसमान पर रखें नजर खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का अनुमानित चरम समय 21 अक्टूबर की रात से 22 अक्टूबर की भोर के बीच है। इसे देखने के लिए आधी रात के बाद से सूर्योदय से पहले तक का समय बेहतर रहेगा। इस दौरान आसमान में रोशनी की लकीरें अलग-अलग दिशाओं में दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, कितनी उल्काएं नजर आएंगी, यह आसमान की स्थिति, मौसम और आसपास की रोशनी पर निर्भर करेगा। बादल छाए रहने या तेज कृत्रिम रोशनी के कारण इन्हें देखना मुश्किल हो सकता है। गोरखपुर में कहां से देख सकते हैं उल्का वर्षा गोरखपुर शहर में रहने वाले लोग ऐसी जगह चुनें, जहां स्ट्रीट लाइट, बाजार और इमारतों की रोशनी कम हो। शहर के बाहरी हिस्से में किसी सुरक्षित और खुले स्थान से आसमान का बड़ा हिस्सा साफ दिखाई देने पर उल्काओं को देखना आसान हो सकता है। आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने के लिए करीब 20 से 30 मिनट का समय दें। इस दौरान मोबाइल की तेज रोशनी से बचें और आसमान के बड़े हिस्से पर नजर रखें। इसके लिए किसी विशेष चश्मे या दूरबीन की जरूरत नहीं है। पूर्व दिशा में दिखाई देगा कालपुरुष तारामंडल अमर पाल सिंह के मुताबिक, ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का विकीर्ण बिंदु ओरियन तारामंडल की दिशा में है। इसे कालपुरुष तारामंडल भी कहा जाता है। अक्टूबर के इन दिनों में यह आधी रात के बाद पूर्वी आकाश में दिखाई देने लगता है। इसके बीच में एक सीध में नजर आने वाले तीन चमकीले तारों की मदद से इसे पहचाना जा सकता है। उल्काएं इसी दिशा से आती हुई प्रतीत होंगी, लेकिन वे आसमान के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे सकती हैं। इसलिए केवल पूर्व दिशा में देखने के बजाय आसमान के बड़े हिस्से पर नजर रखना बेहतर होगा। हैली धूमकेतु के मलबे से बनती है उल्का वर्षा खगोलविद ने बताया कि ओरियोनिड्स उल्का वर्षा का संबंध प्रसिद्ध हैली धूमकेतु से है। यह धूमकेतु लगभग 76 साल में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। अपनी यात्रा के दौरान यह धूल और बर्फ के छोटे-छोटे कण पीछे छोड़ता जाता है। हर साल अक्टूबर में जब पृथ्वी इस मलबे के रास्ते से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। तेज गति के कारण इनमें गर्मी पैदा होती है और ये चमकने लगते हैं। इसी घटना को ओरियोनिड्स उल्का वर्षा कहा जाता है। हैली धूमकेतु आखिरी बार 1986 में दिखाई दिया था और इसके 2061 में फिर से दिखाई देने की उम्मीद है। हालांकि, इसके मलबे से बनने वाली ओरियोनिड्स उल्का वर्षा हर साल अक्टूबर में होती है। यही धूमकेतु मई में होने वाली एटा एक्वेरिड उल्का वर्षा का भी स्रोत है। 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं उल्काएं ओरियोनिड्स उल्काएं करीब 66 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं। इनकी तेज गति के कारण आसमान में कुछ पल के लिए चमकदार लकीरें दिखाई देती हैं। अधिकतर उल्काएं सफेद या हल्के पीले रंग की होती हैं, जबकि कुछ में हरे या नारंगी रंग की चमक भी दिखाई दे सकती है। कभी-कभी बेहद चमकीली उल्काएं भी नजर आती हैं, जिन्हें फायरबॉल कहा जाता है। हालांकि, उल्का वर्षा के नाम से यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि आसमान में लगातार बारिश की तरह उल्काएं गिरती दिखाई देंगी। इनके बीच कुछ समय का अंतर भी हो सकता है। चंद्रमा की रोशनी डाल सकती है असर इस बार उल्का वर्षा के दौरान बढ़ते हुए चंद्रमा की रोशनी भी देखने में बाधा डाल सकती है। ऐसे में भोर से पहले का वह समय बेहतर रहेगा, जब चंद्रमा अस्त हो चुका हो और आसमान अपेक्षाकृत अंधेरा हो। अमर पाल सिंह के अनुसार, उल्का वर्षा कई रातों तक सक्रिय रहती है। इसलिए 21 अक्टूबर की रात कम उल्काएं दिखाई देने पर दूसरी रातों में भी इन्हें देखने की कोशिश की जा सकती है। सोशल मीडिया की भ्रामक जानकारियों से बचने की अपील खगोलविद अमर पाल सिंह ने लोगों से अपील की है कि खगोलीय घटनाओं से जुड़ी जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर किए जाने वाले अप्रमाणित दावों पर भरोसा न करें। घटना के समय, दिशा और वैज्ञानिक कारणों की जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से ही प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि ओरियोनिड्स उल्का वर्षा प्रकृति की नियमित खगोलीय घटना है। इसे देखने के लिए महंगे उपकरणों की नहीं, बल्कि साफ आसमान, कम रोशनी वाली जगह और धैर्य की जरूरत है।
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