गोरखपुर में सिर कटी मां छिन्नमस्तिका की मूर्ति स्थापित:111 मुख और 64 हाथों वाली डिजिटल माता आकर्षण का केंद्र, ,पलकें खोलकर देंगी आशीर्वाद
गोरखपुर के रुस्तमपुर नहर रोड स्थित छिन्नमस्तिका माता की अद्भुत मूर्ति शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसमें मां काली अपना सिर काटकर सहेलियों को खून पिलाकर भूख मिटाती हुई नजर आ रही हैं। इस डिजिटल मूर्ति में मां काली अपने आंखों को खोल और बंद करके भक्तों को आशीर्वाद देंगी। इसके अलावा मूर्ति में माता के 111 सिर और 64 हाथों की भव्यता देखते बन रही। पट खुलने से पहले ही दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी। उधर से गुजरने वाले हर लोग बच्चे, महिला और पुरुष एक बार रुक कर दर्शन जरूर कर रहे हैं। साथ ही फोटो और वीडियो के माध्यम से इस अद्भुत दृश्य को कैमरे में कैद करते हुए नजर आएं। देखिए तस्वीरें… जबलपुर की मूर्ति से मिला था विचार
मूर्ति स्थापित करने वाली महाकाल समिति के सदस्य संजय चौहान ने बताया कि हर साल समिति शहरवासियों के लिए कुछ नया करने की कोशिश करती है। उन्होंने पिछले साल नवरात्रि के समय सोशल मीडिया पर जबलपुर की एक ऐसी ही मूर्ति देखी थी, जो समिति के सदस्यों को बहुत पसंद आई। इसके बाद ही उन्होंने तय कर लिया था कि अगले साल गोरखपुर में छिन्नमस्तिका माता की ऐसी ही मूर्ति बनाई जाएगी। संजय ने बताया कि साल 2025 में भी समिति ने 108 सिर और 121 हाथों वाली मूर्ति स्थापित की थी, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था। हालांकि, भीड़ ज्यादा होने के कारण कई लोग दर्शन नहीं कर पाए थे। इसलिए इस बार उसी थीम को आगे बढ़ाते हुए छिन्नमस्तिका माता की यह नई डिजिटल मूर्ति तैयार कराई गई है। 2.5 लाख की लागत और 4 महीने की मेहनत
4 महीने पहले ही इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दे दिया गया था। गुलरिया के मूर्तिकार विनोद ने इसे बनाया है। यह मूर्ति 2.5 लाख से ऊपर की लागत में बनी है। गुरुवार दोपहर 12 बजे जैसे ही मूर्ति को कारखाने से लाकर रुस्तमपुर के पंडाल में स्थापित गया, तभी से दर्शन करने वालों की भीड़ लगने लगी। सोशल मीडिया पर वायरल हुई
कारखाने से पंडाल तक पहुंचने के दौरान ही इस मूर्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। दूर-दूर से लोग जगह पूछते हुए दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। सप्तमी की रात को पट खोला जाएगा, जिसके बाद मां काली की आंखें खुलने और बंद होने का दृश्य लोग देख सकेंगे। कैसे बना छिन्न मस्तिका माता का रूप पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती अपनी दो सहेलियों जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गई थीं। स्नान के बाद उनकी सहेलियों को तीव्र भूख लगी। व्याकुल होकर जब उन्होंने भोजन मांगा, तो माता पार्वती ने अपने ही तलवार से अपना सिर काट लिया। उनके शरीर से जो तीन रक्त की धाराएं निकलीं, उनसे उनकी दोनों सहेलियों और स्वयं माता की भूख शांत हुई। इस त्याग और रौद्र रूप के कारण उनका नाम 'छिन्नमस्ता' (कटे हुए सिर वाली देवी) पड़ा।
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