गर्दन की दबी नस ठीक की, दर्द से राहत मिली:SGPGI में रेडियो-फ्रीक्वेंसी से इलाज, चेहरे पर हमेशा दर्द रहता था
SGPGI लखनऊ के पेन क्लिनिक में 2 महिलाओं के चेहरे के दर्द की असली वजह पहचानकर उसे दूर किया गया। दोनों महिलाओं को सालों से हो रहे दर्द से राहत मिल गई है। महिलाओं की उम्र 45 और 51 साल है। उन दोनों को पहले ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया मानकर इलाज दिया गया था। रायबरेली की 45 वर्षीय कमला देवी लंबे समय से चेहरे के तेज दर्द से परेशान थीं। दर्द इतना अधिक था कि उनके रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे थे। कई जगह इलाज कराने के बाद उन्हें ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया बताया गया और सर्जरी भी हुई, लेकिन कुछ समय बाद दर्द दोबारा लौट आया। एसजीपीजीआई के पेन क्लिनिक में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि दर्द की वजह गर्दन में दब रही एक नस से जुड़ी थी। इसके बाद स्टर्नोक्लाइडोमास्टॉइड हाइड्रोडिसेक्शन के जरिए नस को दबाव से मुक्त किया गया। इसके साथ संबंधित नस पर स्फेनोपैलेटाइन गैंग्लियन रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया की गई। उपचार के बाद कमला देवी को दर्द में काफी राहत मिली। कान-जबड़े के दर्द को भी समझा गया था ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया अयोध्या की 51 वर्षीय गीता पांडेय के मामले में भी लंबे समय से एक तरफ कान, जबड़े और कनपटी के आसपास दर्द था। ठंड लगने, हल्का स्पर्श होने या कुछ चबाने पर दर्द बढ़ जाता था। पहले इसे भी ट्राइजेमिनल न्यूरालजिया मानकर उपचार किया गया, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिली। एसजीपीजीआई में दोबारा जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे ऑरिक्युलोटेम्पोरल न्यूरालजिया से जुड़ा पाया। डॉक्टरों के अनुसार, इसकी जड़ भी गर्दन की नस पर दबाव से जुड़ी थी। इसी दिशा में उपचार करते हुए संबंधित नस पर रेडियोफ्रीक्वेंसी प्रक्रिया की गई। इसके बाद मरीज को लंबे समय तक राहत मिली और वह सामान्य गतिविधियों की ओर लौट सकीं। इलाज के बाद भी दर्द रहे तो दोबारा जांच जरूरी पेन क्लिनिक के प्रोफेसर डॉ. सुजीत गौतम के मुताबिक, चेहरे से जुड़े अलग-अलग प्रकार के न्यूरोपैथिक दर्द के लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई देते हैं, जबकि उनकी वजह अलग-अलग नसों में हो सकती है। ऐसे में सही पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज का दर्द उपचार के बावजूद बना रहता है, तो उसी उपचार को लगातार दोहराने के बजाय बीमारी के निदान पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। दांतों के इलाज, पुरानी चोट या गर्दन की नस पर दबाव जैसी वजहें भी चेहरे के दर्द के पीछे हो सकती हैं। 26 सितंबर को दर्द जागरूकता कार्यक्रम एसजीपीजीआई का पेन क्लिनिक 26 सितंबर को क्रॉनिक पेन अवेयरनेस कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम नवीन ओपीडी के कमरा नंबर 31 और 32 में होगा। आने वाले मरीजों को उनकी समस्या के अनुसार व्यक्तिगत सलाह देने की व्यवस्था भी की गई है। पेन क्लिनिक ओपीडी सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक और शनिवार सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक डी ब्लॉक, नवीन ओपीडी के कमरा नंबर 31 और 32 में संचालित होती है।
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