गवाहों की गवाही से कोर्ट में खुलेंगी वारदात की परतें:कल से कपसाड़ कांड में शुरु होगा ट्रायल, अपहरण व हत्या मामले में चलेगा मुकदमा
सरधना के कपसाड़ गांव में सुनीता जाटव की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के बहुचर्चित कपसाड़ कांड में कल से कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा। आरोपी पारस सोम के खिलाफ अब बालिग के रूप में मुकदमे की सुनवाई का रास्ता साफ हो चुका है। ऐसे में कोर्ट की कार्यवाही इस मामले में अहम पड़ाव मानी जा रही है। अभियोजन पक्ष के सामने हत्या और अपहरण से जुड़े आरोपों को साक्ष्यों और गवाहों के जरिए साबित करने की चुनौती होगी। वहीं, बचाव पक्ष को भी आरोपों का जवाब देने और साक्ष्यों पर सवाल उठाने का पूरा कानूनी अधिकार रहेगा। पहले एक नजर डालते हैं वारदात पर
8 जनवरी, 2026 की सुबह कपसाड़ गांव निवासी 50 वर्षीय सुनीता जाटव अपनी बेटी रूबी के साथ खेत पर काम करने जा रही थी। तभी इसी गांव का पारस सोम वहां आ गया। आरोप है कि पारस ने सुनीता के सामने रूबी को अगवा करने का प्रयास किया। सुनीता ने विरोध किया तो पारस ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। सुनीता लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गई और आरोपी रूबी को अगवा कर फरार हो गया। सुनीता को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। कई महीने रहा कपसाड़ में तनाव
मामला दलित महिला की हत्या कर उसकी बेटी के अपहरण से जुड़ा था। इसको लेकर कपसाड़ व आस पास के गांवों में तनाव फैल गया। परिवार ने सुनीता के शव को रास्ते पर रखकर जाम लगा दिया। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की। लखनऊ तक मामले की गूंज पहुंची, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट हो गया। गांव में बाहरी लोगों की एंट्री बैन कर दी और जैसे तैसे परिवार को समझा बुझाकर सुनीता के शव का पोस्टमार्टम कराते हुए अंतिम संस्कार कराया। 48 घंटे में रूबी को किया बरामद
तत्कालीन एसएसपी डा. विपिन ताडा ने 10 पुलिस टीमों को रूबी की बरामदगी के लिए लगाया। महज 48 घंटे के भीतर पुलिस ने आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर रूबी को सकुशल बरामद कर लिया। पारस को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। हालांकि रूबी काउंसलिंग के बाद परिजनों के साथ भेजी गई। उम्र के सवाल पर पहले हो चुकी है सुनवाई
कपसाड़ कांड में पारस सोम की उम्र को लेकर उसके पक्ष की ओर से उसे नाबालिग बताया गया था। इस कारण मामले की सुनवाई को लेकर किशोर न्याय बोर्ड में प्रक्रिया चली। जून-2026 में बोर्ड ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर घटना के समय उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक मानी। इसके बाद अगस्त 2026 में सेशन कोर्ट ने भी बोर्ड के निर्णय को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। सिलसिलेवार जानिए कोर्ट की प्रक्रिया… - मुकदमे का अहम चरण अभियोजन पक्ष के साक्ष्य प्रस्तुत करने का होगा। पुलिस की विवेचना में शामिल गवाहों को अदालत में बुलाया जाएगा। - वादी के बाद घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों, जांच अधिकारी और अन्य संबंधित गवाहों के बयान दर्ज होंगे। - मामले में उपलब्ध चिकित्सकीय, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी नियमानुसार पेश किए जा सकते हैं। - अभियोजन पक्ष का गवाह बयान दर्ज कराएगा तो बचाव पक्ष के वकील को उससे जिरह करने का अवसर मिलेगा। - जिरह में गवाह के बयान, घटनाक्रम की जानकारी और साक्ष्यों की विश्वसनीयता से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं। - अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पूरे होने के बाद अदालत आरोपी से उसके खिलाफ आए साक्ष्यों पर स्पष्टीकरण मांग सकती है। - कानूनी प्रक्रिया के अनुसार बचाव पक्ष को अपने साक्ष्य पेश करने का अवसर भी मिलता है। इसके बाद दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनी जाती हैं। - सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत फैसला सुनाएगी। - यदि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित कर देता है तो दोष सिद्ध हो सकते हैं। - यदि आरोप साबित नहीं होते तो कानून के अनुसार आरोपी को बरी किया जा सकता है। दोष सिद्धि होने पर सजा के प्रश्न पर भी अदालत सुनवाई करेगी। ट्रायल से ठीक पहले वकील बदला
शनिवार से केस ट्रायल पर आ रहा है। उससे ठीक पहले वादी नरसी की ओर से अपने अधिवक्ता को बदल दिया गया है। पहले इस केस को राजेंद्र सिंह लड़ रहे थे। अब इस केस को लड़ने वाले एडवोकेट रिसायत अली का कहना है कि उनके पास यह केस आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भेजा है। वह आरोपी को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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