हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द की:27 साल पुराने मामले में 4 आरोपियों को बरी किया, आरोप नहीं साबित हो पाए

Oct 12, 2026 - 23:49
0
हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द की:27 साल पुराने मामले में 4 आरोपियों को बरी किया, आरोप नहीं साबित हो पाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 1999 के हत्या के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में विफल रहा। मामला सुल्तानपुर के कोतवाली नगर थाने में दर्ज वर्ष 1999 के मुकदमे से जुड़ा है। इसमें दिनेश शुक्ला, राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और जगदीश को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि एक मार्च 1999 को दिनेश शुक्ला अजय शुक्ला को अपने साथ ले गए थे। बाद में अजय गोली लगने से घायल अवस्था में मिले और इलाज के दौरान 2 मार्च 1999 को लखनऊ में उनकी मृत्यु हो गई। आरोपियों ने उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी इस मामले में फैजाबाद की अपर सत्र अदालत ने 30 अप्रैल 2022 को दिनेश शुक्ला को हत्या और अपहरण के आरोप में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, राकेश शुक्ला, राजेश शुक्ला और जगदीश को आपराधिक साजिश के तहत अपहरण और हत्या के आरोपों में उम्रकैद की सजा दी गई थी। चारों आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ऐसी स्थिति में आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए सभी परिस्थितियों का आपस में जुड़ा होना और आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक था। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की आवश्यक कड़ी साबित नहीं कर सका। साथ ही, अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप साबित करने के लिए भी स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिले।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User