हरदोई के सवायजपुर में अनियंत्रित बाइक खंती में गिरी:दो युवक रातभर पड़े रहे, एक की मौत; साथी घायल अस्पताल भेजा गया
हरदोई के सवायजपुर कोतवाली में कटरा-उन्नाव हाईवे पर बुधवार रात दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। खितौली गांव के मोड़ के पास एक अनियंत्रित बाइक सड़क किनारे गहरी खंती में जा गिरी। हादसे में बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल होकर रातभर घटनास्थल पर ही पड़े रहे। गुरुवार सुबह ग्रामीणों की नजर दोनों पर पड़ी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को खंती से बाहर निकाला। पुलिस के मुताबिक, तब तक बाइक चला रहे मोनू उर्फ उत्कर्ष की मौत हो चुकी थी। घायल नन्हे उर्फ प्रतीक को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब 6 बजे सूचना मिलने पर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे थे। सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र के नगरा मजरा कन्हारी निवासी नन्हे उर्फ प्रतीक (25) और मोनू उर्फ उत्कर्ष (30) बुधवार रात बाइक से सवायजपुर से अपने घर लौट रहे थे। खितौली गांव के मोड़ के सामने अचानक बाइक अनियंत्रित हो गई और हाईवे से नीचे खंती में जा गिरी। दोनों युवक बाइक समेत गहरी खंती में जा गिरे। घायल नन्हे ने बताया कि मोड़ के सामने अचानक बाइक नियंत्रण से बाहर हो गई। इसके बाद दोनों हाईवे से नीचे जा गिरे। हादसे के बाद रातभर दोनों घटनास्थल पर ही पड़े रहे और सुबह ग्रामीणों की नजर पड़ने के बाद पुलिस को इसकी जानकारी हो सकी। ग्रामीणों ने सुबह खंती में पड़े युवकों को देखा गुरुवार सुबह ग्रामीण जब हाईवे से होकर गुजर रहे थे, तभी उन्होंने सड़क किनारे गहरी खंती में दोनों युवकों को पड़ा देखा। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही सवायजपुर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव शुरू किया। पुलिस ने मौके की जांच करने के बाद दोनों घायलों को खंती से बाहर निकाला। जांच के दौरान मोनू उर्फ उत्कर्ष की मौत हो चुकी थी, जबकि नन्हे उर्फ प्रतीक घायल अवस्था में मिला। पुलिस ने उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा थानाध्यक्ष प्रिंस कुमार ने बताया कि मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे की जांच की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। परिजनों के अनुसार हादसे के समय मोनू ने हेलमेट नहीं लगाया था। वह पिकअप से दूध डेयरी तक पहुंचाने का काम करता था। मोनू परिवार का इकलौता पुत्र था। उसकी तीन बहनें हैं। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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