हरदोई में गंगा और रामगंगा समेत 5 नदियों का उफान:सैकड़ों गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, खेतों में डूबी फसलें; कट गईं सड़कें
हरदोई जिले में गंगा, रामगंगा, गर्रा, गोमती और सई नदी के उफान के साथ बीते दिनों हुई बारिश ने हालात गंभीर कर दिए हैं। जिले के कई इलाकों में बाढ़ का पानी खेतों और रिहायशी क्षेत्रों में घुस गया है। लहलहाती फसलें जलमग्न होने से किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो रही है। गांवों की गलियों और रास्तों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित है। फसलों के नुकसान के चलते किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जिले में हर साल आने वाली बाढ़ अब किसानों और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। बार-बार फसलें डूबने और खेतों में पानी भरने से किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस बार भी बाढ़ के पानी ने कई इलाकों में खेती को प्रभावित किया है। किसानों को आशंका है कि फसल बर्बाद होने से उनकी आमदनी पर गंभीर असर पड़ेगा। सवायजपुर, बिलग्राम और संडीला तहसीलों में हालात गंभीर जिले की सवायजपुर, बिलग्राम और संडीला तहसीलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बाढ़ के पानी से जनजीवन प्रभावित है। वहीं, भरावन और कछौना विकासखंड में गोमती नदी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। नदी का पानी सैकड़ों गांवों में घुसने से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई जगह खेतों और रिहायशी इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है। भटपुर के आसपास कई गांवों में बढ़ी परेशानी भरावन क्षेत्र में भटपुर के पास देवरी, कटका कला, कटका खुर्द, कूड़ा लक्ष्मणपुरवा, तुलसीपुर, सिकरी, धना खेड़ा, बंभुआ, महिठा, नगखेड़ा और मंदौली सहित कई गांवों में जलस्तर बढ़ने से लोगों को रास्ता तय करने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा बिलग्राम क्षेत्र के राइजिंग पुरवा, मक्कू पुरवा और चिरंजू पुरवा में भी बाढ़ के पानी ने नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर सड़कें कट जाने से गांवों का संपर्क बाधित हो गया है। भाकियू ने सर्वे कराकर आर्थिक सहायता देने की मांग की बाढ़ से प्रभावित किसानों की परेशानी को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष प्रगट सिंह ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराने और किसानों को आर्थिक सहायता देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है और वे गहरी परेशानी में हैं। ऐसे में नुकसान का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना जरूरी है, ताकि वे आर्थिक संकट से उबरकर दोबारा खेती-किसानी शुरू कर सकें।
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