हत्या से पहले जमकर उपद्रव, वीडियो सामने आया:1:30 सेकेंड के वीडियो में दोनों पक्ष भिड़ते दिखे, दो पुलिसवाले भी नजर आए
प्रयागराज में अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या के मामले में अब वारदात से ठीक पहले का एक वीडियो सामने आया है। करीब 1 मिनट 30 सेकेंड के इस वीडियो में जमीन के विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती नजर आ रही है। वीडियो में मृतक अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव और उनकी पत्नी वर्षा श्रीवास्तव भी दिखाई दे रही हैं। वहीं, दूसरे पक्ष से हत्या के आरोपी देवेंद्र नाथ मिश्रा और उसके साथ मौजूद अन्य लोग नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में दो पुलिसकर्मी भी दिखाई दे रहे हैं। इनमें ईश्वर शरण चौकी प्रभारी विनय यादव और उनका हमराही शामिल हैं। अधिवक्ता की पत्नी पहले ही आरोप लगा चुकी हैं कि पुलिस की मौजूदगी में उनके पति को गोली मारी गई थी। ऐसे में वीडियो सामने आने के बाद घटनास्थल पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उस दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मारपीट से शुरू हुआ विवाद सलोरी स्थित संपत्ति को लेकर अधिवक्ता सतीश चंद्र श्रीवास्तव और देवेंद्र नाथ मिश्रा के बीच पहले से विवाद चल रहा था। 15 अक्टूबर को इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। सामने आए वीडियो में दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। वीडियो को विवाद की शुरुआत के समय का बताया जा रहा है। इसमें दोनों पक्षों के लोगों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई नजर आती है। मामले में सतीश की पत्नी वर्षा श्रीवास्तव ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि देवेंद्र नाथ मिश्रा, उसके बेटों और अन्य लोगों ने उनके घर में घुसकर हमला किया। तहरीर के मुताबिक, इसी दौरान देवेंद्र के बेटों ने अपने पिता को ललकारते हुए कहा, “पापा, इसे जान से मार दो।” आरोप है कि इसके बाद देवेंद्र नाथ मिश्रा ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से सतीश के पेट में गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल सतीश को पहले राज नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां से उन्हें एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिसकर्मी मौजूद थे तो कैसे बढ़ी बात? वीडियो में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विवाद के दौरान उन्होंने क्या कार्रवाई की और गोली चलने से पहले हालात को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। वीडियो की जांच से सामने आ सकते हैं अहम तथ्य हत्या से पहले मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद जांच में यह फुटेज अहम साक्ष्य बन सकता है। इससे विवाद के दौरान दोनों पक्षों की मौजूदगी, मारपीट के घटनाक्रम और पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच में मदद मिल सकती है। हालांकि, वीडियो में गोली चलने का दृश्य है या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। अब पुलिस जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, घटनाक्रम के समय और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि विवाद के दौरान पुलिसकर्मियों ने क्या कार्रवाई की और गोली चलने से पहले तथा बाद में घटनास्थल पर क्या हुआ।
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