इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक लाख फैसले हिंदी में उपलब्ध:वेबसाइट पर मुफ्त पढ़ सकेंगे लोग, न्याय को आम लोगों तक पहुंचाने की पहल

Oct 09, 2026 - 17:59
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक लाख फैसले हिंदी में उपलब्ध:वेबसाइट पर मुफ्त पढ़ सकेंगे लोग, न्याय को आम लोगों तक पहुंचाने की पहल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक लाख फैसलों का हिंदी में अनुवाद पूरा कर लिया है। ये सभी फैसले हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त उपलब्ध हैं। न्याय को आम लोगों की भाषा में सुलभ बनाने की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि है। इस मौके पर पांच अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के संरक्षण में ‘द वर्नाक्युलर वॉइस ऑफ जस्टिस’ नाम की स्मारिका का विमोचन किया गया। इसमें सुबास प्रकोष्ठ (SUVAS Cell) की ओर से पहले अनुवादित फैसले से लेकर एक लाखवें फैसले तक के सफर को शामिल किया गया है। मुख्य न्यायाधीश ने अपलोड किया एक लाखवां फैसला हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने हिंदी में अनुवादित एक लाखवें फैसले को वेबसाइट पर अपलोड किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एचसीआर एवं आईएलआर कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजित कुमार सहित अन्य न्यायमूर्तिगण मौजूद रहे। इस पहल का उद्देश्य कानूनी समुदाय के साथ आम लोगों को भी न्यायिक फैसलों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है। 2023 में शुरू हुई थी पहल हाईकोर्ट में हिंदी अनुवादित पहला फैसला 23 अगस्त 2023 को अपलोड किया गया था। इसके बाद 12 दिसंबर 2025 को 50 हजारवां अनुवादित फैसला अपलोड किया गया। अब पांच अक्टूबर 2026 तक यह संख्या एक लाख पहुंच गई है। इस काम के लिए 16 अगस्त 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुबास प्रकोष्ठ की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य तकनीक की मदद से न्यायिक फैसलों को देशज भाषाओं में उपलब्ध कराना और न्याय व्यवस्था को अधिक सरल व सुलभ बनाना है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हो रहा अनुवाद प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 363 फैसलों का भी हिंदी में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ मामलों में सुप्रीम कोर्ट के 28 और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से जुड़े मामलों में तीन फैसलों का अनुवाद उपलब्ध है। सितंबर 2026 तक ‘न्यायभाषा-न्याय की किरण’ ई-पत्रिका के सात अंक प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित छह ई-पुस्तिकाएं भी जारी की गई हैं।

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