सुप्रीम कोर्ट की ओर विपक्ष का मार्च, दिल्ली में छह मेट्रो स्टेशन बंद!
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के तहत इंडिया गठबंधन सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च करने की तैयारी में है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय नहीं मिला। प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई है और छह मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच विपक्षी दलों के गठबंधन ने सोमवार, 12 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च करने की तैयारी की है। इस मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है, जबकि कई प्रमुख मार्गों पर यातायात में बदलाव किया गया है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन भी बंद रखे गए हैं।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मांगा था मुलाकात का समय
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। दोनों नेता मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर मतदान में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का अनुरोध किया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की तैयारी की।
‘चलो दिल्ली’ मार्च के लिए जुटेंगे विपक्षी नेता
कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली—लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया है। पार्टी की योजना के अनुसार, प्रदर्शनकारी दोपहर करीब डेढ़ बजे कनॉट प्लेस और बाराखंभा मार्ग के चौराहे के आसपास एकत्र हो सकते हैं। इसके बाद विपक्षी सांसद सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च करने की तैयारी में हैं। इस प्रदर्शन का प्रमुख उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी आपत्तियां उठाना और मतदान प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर ध्यान आकर्षित करना है।
मार्च में ममता बनर्जी और अखिलेश यादव के शामिल होने की संभावना
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के शामिल होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के भी मार्च में शामिल होने की चर्चा है। इसके अलावा, इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और युवाओं की भागीदारी भी संभावित है। हालांकि, सभी नेताओं की भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होनी बाकी है।
दिल्ली में भारी सुरक्षा, सर्वोच्च न्यायालय के आसपास पुलिस तैनात
इंडिया गठबंधन के मार्च को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। संसद मार्ग पर भी भारी संख्या में पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रख रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। प्रदर्शन के मद्देनजर प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किए जाने से लोगों को यात्रा के दौरान परेशानी हो सकती है।
दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन बंद
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में छह मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने की जानकारी सामने आई है। इनमें पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों के बंद रहने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे घर से निकलने से पहले मेट्रो और यातायात संबंधी ताजा सूचनाओं की पुष्टि कर लें।
महुआ मोइत्रा ने साझा की प्रदर्शन से पहले की तस्वीरें
तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने प्रदर्शन से पहले की कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में इंडिया गेट और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती दिखाई गई। विपक्ष के प्रस्तावित मार्च के कारण राजधानी के कई महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस की तैयारियों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि मार्च किस तरह आगे बढ़ता है और विपक्ष अपनी मांगों को किस प्रकार सामने रखता है।
ओवैसी ने इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन से बनाई दूरी
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन से दूरी स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सर्वोच्च न्यायालय भी इस अधिकार पर टिप्पणी कर चुका है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनका इंडिया गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है और वह उसके कार्यक्रम पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि उन्होंने इस मार्च को लेकर अपनी राजनीतिक स्थिति अलग रखी है।
अब आगे क्या होगा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की नाराजगी और मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात नहीं हो पाने के बाद यह मार्च राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी नेता मतदान प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों को उठाना चाहते हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के सामने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। अब देखना होगा कि विपक्षी नेताओं को सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की अनुमति मिलती है या पुलिस उन्हें निर्धारित स्थानों पर ही रोकती है।
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