इंटरव्यू- पप्पू इस जन्म में कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता:साध्वी प्राची बोलीं- चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष को घेरा

Oct 03, 2026 - 21:14
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इंटरव्यू- पप्पू इस जन्म में कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता:साध्वी प्राची बोलीं- चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष को घेरा
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की वरिष्ठ नेत्री साध्वी प्राची ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राहुल गांधी (पप्पू) इस जन्म में कभी भी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। बरेली सर्किट हाउस में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपना दायित्व निभा रहे हैं। साध्वी प्राची ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की एकमात्र परेशानी यही है कि वे किसी भी तरह सत्ता हासिल करना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता अब उनके मंसूबों को अच्छी तरह समझ चुकी है। चुनाव आयुक्त की ईमानदारी पर सवाल और वोट बैंक की राजनीति साध्वी प्राची ने कहा कि देश में जब भी कोई अधिकारी या संस्था ईमानदारी और निष्ठा से काम करती है, तो विपक्ष विरोध और हायतौबा मचाने लगता है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि फर्जी और अवैध मतदाताओं के नाम कटने से विपक्ष में छटपटाहट है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने लंबे समय तक तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति की है, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा। उन्होंने पुरजोर दावा किया कि चाहे 2027 के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव हों या 2029 का लोकसभा चुनाव, जनता के समर्थन से एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार बनेगी। अभिषेक दीपके और सीजेपी के विरोध पर 'कॉकरोच' साध्वी का बयान ​अभिषेक दीपके, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) और अन्य संगठनों द्वारा चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों के सवाल पर साध्वी प्राची ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "चाहे कॉकरोच हो या विपक्ष, ये सब एक ही हैं। इनकी समस्या केवल यही है कि ये देश के भीतर किसी सच्चे देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति को प्रधानमंत्री के रूप में देखना और बर्दाश्त नहीं करना चाहते। आज देश सुरक्षित हाथों में है, लेकिन ये लोग देश को सुरक्षित नहीं रहने देना चाहते। इसी बौखलाहट में ये लोग जंतर-मंतर पर धरने और इस्तीफे की नौटंकी कर रहे हैं। देश की सत्ता अब इनके हाथों में कभी नहीं आने वाली।' जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नीतिगत मुद्दे और विपक्ष का दोहरा रवैया विपक्ष द्वारा जंतर-मंतर पर किए जा रहे प्रदर्शनों, आरक्षण और अन्य नीतिगत मुद्दों पर पूछे गए सवालों पर साध्वी प्राची ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह गैर-जरूरी विषयों को तूल देकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने हाल ही में विमान हादसे को टालकर 180 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई देशहित या बहादुरी का बड़ा काम होता है, तब विपक्ष चुप्पी साध लेता है। उनका कहना था कि विरोध केवल विरोध की खातिर नहीं होना चाहिए, बल्कि देश की सुरक्षा और अखंडता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन और महिला सुरक्षा पर बयान देशभर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के मुद्दे पर साध्वी प्राची ने गृह मंत्री अमित शाह के रुख का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब देश एक है, तो कानून और संविधान भी सभी नागरिकों के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कानूनों की दीवारें खत्म होनी चाहिए ताकि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके। दिल्ली और अन्य राज्यों में महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि अपराध कहीं भी हो, वह अत्यंत निंदनीय और दुखद है, लेकिन विपक्ष केवल भाजपा शासित क्षेत्रों में घटनाओं को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करता है, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों के मामलों पर मौन साध लेता है। गरबा-डांडिया में गैर-हिंदुओं का प्रवेश: आईडी जांच और परिवार के साथ आने की शर्त आगामी नवरात्रि और डांडिया आयोजनों में गैर-हिंदू युवकों के प्रवेश के मुद्दे पर साध्वी प्राची ने बजरंग दल की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आयोजनों की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखने के लिए पहचान पत्रों (आईडी) की गहन जांच होनी चाहिए, क्योंकि कई बार पहचान छुपाकर प्रवेश की शिकायतें आती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अन्य समुदाय के लोगों को वास्तव में सनातन संस्कृति, गरबा या मां दुर्गा की उपासना में आस्था है, तो उनका स्वागत है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपने परिवार और महिलाओं के साथ आना चाहिए और खुले मन से उत्सव में शामिल होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा ऐसे लोगों को घर वापसी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों की मर्यादा का सम्मान हर हाल में होना चाहिए।

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