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हर दिन महीने जैसा लग रहा है: हमलों के बीच ईरान के लोगों का डर और उम्मीद

अमेरिका और इसराइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध को लगभग एक हफ़्ता हो चुका है. युद्ध की शुरुआत से ही, लगातार हो रहे हवाई हमलों, सुरक्षा बलों की धमकियों और इंटरनेट बंदी के बीच ईरानी लोग अपने परिजनों से संपर्क बनाए रखने की कोशिशें कर रहे हैं.

देश के अंदर लोगों से बात करना मुश्किल है, लेकिन कई ईरानियों ने, जिनकी पहचान सुरक्षा कारणों से बदल दी गई है, बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी से अपने अनुभव साझा किए हैं.

तेहरान में ही रहने वाले बाबक कहते हैं कि हमले शुरू होने के साथ ही लोग खाने-पीने का सामान जुटाने बाज़ारों की ओर भागे.

बाबक ने भी महसूस किया है कि इस बार हमलों की तीव्रता 12 दिन के युद्ध के दौरान हुए हमलों से बहुत ज़्यादा है.

उनके मुताबिक़, “पिछली बार तो हम एयर डिफ़ेंस मिसाइलें दाग़े जाने की आवाज़ सुनकर समझ जाते थे कि हमला हो गया है, लेकिन अब अचानक धमाका सुनाई देता है और चारों ओर तबाही फैल जाती है.”

तेहरान में रहने वाले सालार ने बताया, “जो हम इस वक़्त झेल रहे हैं, वह पिछले साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध से भी कहीं ज़्यादा भयानक है. विस्फोटों की संख्या, तबाही, जो कुछ भी हो रहा है, यक़ीन करना मुश्किल है.”

अमेरिका और इसराइल ने संयुक्त रूप से 28 फ़रवरी को ईरान पर हमले किए थे. ईरान की राजधानी तेहरान तब से ही लगातार हो रहे हमलों की चपेट में है. सालार तेहरान में ही रहते हैं.

हाल ही में हुई एक एयरस्ट्राइक के बारे में बताते हुए सालार कहते हैं, “धमाके की आवाज़ों से खिड़कियां और परदे तक हिल गए. मैंने शीशा टूटने से बचाने के लिए खिड़कियाँ खुली छोड़ दीं. पूरा घर कांप उठा… हर दिन एक महीने जैसा लग रहा है. हमलों की रफ़्तार बहुत तेज़ है.”

तेहरान से क़रीब 275 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में रहने वाले क़ावेह ने बताया, “हमले के पहले तीन दिनों में हमारे शहर पर भारी बमबारी हुई. हमारे इलाक़े के ऊपर से लगातार लड़ाकू विमान गुज़रते रहते हैं.”

क़ावेह के मुताबिक़ युद्ध के पहले दिन के बाद से ही हवाई हमलों की जगह से उठ रहे धुएं की वजह से आसमान में धुएं के बादल छाए रहते हैं.