हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर भारत का कड़ा रुख, संयुक्त राष्ट्र में दिया बड़ा संदेश – “हमले बर्दाश्त नहीं”
मध्य पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सख्त और संतुलित रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार का हमला या बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों और उनमें भारतीय नाविकों की मौत पर भारत ने गहरी चिंता जताई है और इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
दि राइजिंग न्यूज़ डेस्क | 17 अप्रैल 2026 ।
मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारत ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और हमले वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं।
भारत ने विशेष रूप से व्यापारिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा का उल्लंघन है। भारत ने साफ किया कि निर्दोष नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, भारत का यह बयान शांति, स्थिरता और वैश्विक व्यापार की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही यह भी संकेत देता है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत अब अधिक स्पष्ट और प्रभावी भूमिका निभा रहा है
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की चेतावनी
भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग बताते हुए कहा कि यहां किसी भी प्रकार की बाधा या हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
भारत का रुख: शांति के साथ सख्ती
भारत ने सभी पक्षों से संयम और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
भारत पर असर
भारत का यह बयान केवल एक सामान्य कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश माना जा सकता है। इसमें भारत ने यह रेखांकित किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक है, लेकिन साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।