ईरानी गायिका को 74 कोड़े की सजा बरकरार, बिना हिजाब गाना पड़ा भारी
ईरान की गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब और कथित तौर पर देश के सांस्कृतिक नियमों का उल्लंघन करने के मामले में सुनाई गई 74 कोड़े मारने की सजा बरकरार रखी गई है। मामला दिसंबर 2024 में उनके द्वारा प्रसारित किए गए एक संगीत कार्यक्रम से जुड़ा है। मानवाधिकार संगठनों ने अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए इसे यातना का रूप बताया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | ईरान | 1 अक्टूबर 2026
ईरान की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी एक बार फिर चर्चा में हैं। ईरान की एक अदालत ने उनके खिलाफ सुनाई गई 74 कोड़े मारने की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला दिसंबर 2024 में प्रसारित किए गए उनके एक संगीत कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने बिना हिजाब के प्रस्तुति दी थी। अदालत के फैसले के बाद मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने ईरान की न्यायिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बिना हिजाब संगीत कार्यक्रम में दी थी प्रस्तुति
दिसंबर 2024 में परस्तू अहमदी ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक संगीत कार्यक्रम प्रसारित किया था। इस प्रस्तुति में उन्होंने बिना हिजाब के गाना गाया और बिना आस्तीन वाली पोशाक पहनी थी। यह कार्यक्रम ईरान के मौजूदा सामाजिक और सांस्कृतिक नियमों के संदर्भ में काफी चर्चा में आया था। इसके बाद ईरानी अधिकारियों की ओर से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
अदालत ने क्यों सुनाई 74 कोड़े की सजा
जून में कोम शहर की एक अदालत ने परस्तू अहमदी और उनकी संगीत कार्यक्रम से जुड़ी टीम के आठ अन्य सदस्यों को सजा सुनाई थी। इनमें संगीतकार भी शामिल थे। अदालत का कहना था कि कार्यक्रम में देश के कानूनी और सांस्कृतिक नियमों का उल्लंघन किया गया और प्रस्तुति को अश्लील तथा आपत्तिजनक माना गया।
हिजाब और शालीनता कानून का मामला
यह कार्रवाई ईरान के हिजाब और शालीनता से जुड़े कानूनों के संदर्भ में की गई है। वर्ष 2024 में इस संबंध में एक नया कानून पारित किया गया था, हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे अभी आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया है। इस कानून के तहत बिना हिजाब रहने या अनुचित कपड़ों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के आरोप में जुर्माना, कोड़े और कुछ परिस्थितियों में जेल जैसी सजा का प्रावधान बताया गया है।
अगले तीन महीनों में दी जा सकती है सजा
परस्तू अहमदी के वकीलों के अनुसार अदालत का फैसला अप्रत्याशित नहीं था। उनका कहना है कि ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख की हालिया टिप्पणियों के बाद इस तरह की कार्रवाई की आशंका बनी हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक अहमदी और उनकी संगीत टीम को अगले तीन महीनों के भीतर कोड़े मारने की सजा दी जा सकती है, हालांकि इसके क्रियान्वयन को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी
मानवाधिकार संगठनों ने 74 कोड़े मारने की सजा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शारीरिक दंड मानव गरिमा और मौलिक अधिकारों के खिलाफ है। अब अदालत द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद इस मामले ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, पहनावे और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है।
पुराने लोकप्रिय गाने गाने को भी माना गया चुनौती
मानवाधिकार कार्यकर्ता रोया बोरूमंद के अनुसार इस संगीत कार्यक्रम को केवल बिना हिजाब प्रस्तुति देने के कारण ही चुनौतीपूर्ण नहीं माना गया। उनके मुताबिक अहमदी ने ईरानी क्रांति से पहले के दौर के लोकप्रिय गीत भी प्रस्तुत किए थे। उनका कहना है कि इस वजह से कार्यक्रम को मौजूदा व्यवस्था के सामाजिक और सांस्कृतिक नियमों को चुनौती देने वाली अभिव्यक्ति के तौर पर देखा गया।
मानवाधिकार वकील ने फैसले को बताया यातना
ईरान के बाहर रहने वाले ईरानी कार्यकर्ताओं को कानूनी सलाह देने वाले संगठन से जुड़े मानवाधिकार वकील मोइन खज़ेली ने अदालत के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कोड़े मारने की सजा मानवाधिकारों के खिलाफ है और इसे यातना का एक रूप माना जा सकता है। उनके अनुसार शारीरिक दंड को कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बनाए रखना मानव गरिमा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामला क्यों है महत्वपूर्ण
परस्तू अहमदी का मामला ईरान में महिलाओं के पहनावे, हिजाब के नियमों और सार्वजनिक रूप से संगीत प्रस्तुति देने की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। अदालत द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवाधिकारों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाह इस बात पर है कि अदालत द्वारा बरकरार रखी गई सजा वास्तव में कब और किस तरह लागू की जाती है।
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