संयुक्त राष्ट्र में इशाक डार ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

Sep 23, 2026 - 14:46
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संयुक्त राष्ट्र में इशाक डार ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। ओआईसी संपर्क समूह की बैठक में उन्होंने 5 अगस्त 2019 के बाद भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर पाकिस्तान की आपत्तियां दोहराईं। पाकिस्तान ने कश्मीर में राजनीतिक और जनसांख्यिकीय बदलावों का आरोप लगाते हुए ओआईसी देशों से इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर पर इस्लामी सहयोग संगठन के संपर्क समूह की मंत्रीस्तरीय बैठक हुई। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने बैठक में पाकिस्तान का पक्ष रखा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, डार इस बैठक में कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराने वाले थे। इशाक डार ने अपने संबोधन में भारत के जम्मू-कश्मीर से जुड़े कदमों पर पाकिस्तान की आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने 5 अगस्त 2019 के बाद हुए बदलावों को कश्मीर की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति से जोड़कर पेश किया। पाकिस्तान लंबे समय से ओआईसी के मंच पर इस मुद्दे को उठाता रहा है।

अनुच्छेद 370 हटाने पर पाकिस्तान का आरोप

पाकिस्तान ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक बदलावों के बाद भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर सवाल उठाया। डार ने आरोप लगाया कि नए आवासीय नियमों, निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े कदमों का इस्तेमाल कश्मीर की राजनीतिक और जनसांख्यिकीय स्थिति बदलने के लिए किया जा रहा है।पाकिस्तान का दावा है कि इन बदलावों से जम्मू-कश्मीर की पहचान और राजनीतिक संरचना प्रभावित हुई है। वहीं भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि अनुच्छेद 370 से संबंधित निर्णय उसका आंतरिक संवैधानिक मामला है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने पहले कहा है कि अनुच्छेद 370 से जुड़े निर्णय भारत के आंतरिक मामलों से संबंधित हैं।

मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा

इशाक डार ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े आरोप भी उठाए। पाकिस्तान की ओर से राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा मीडिया पर प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर की स्थिति पर ध्यान देने की अपील की।पाकिस्तान ने इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों में राजनीतिक बंदियों की रिहाई, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को पहुंच देने तथा कश्मीर में मानवाधिकार स्थिति पर निगरानी की मांग की है। हालांकि इन मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के दावे एक-दूसरे से अलग हैं।

भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव का भी किया जिक्र

पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच 2025 में हुए सैन्य तनाव का भी संदर्भ दिया। डार ने पाकिस्तान के आधिकारिक रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादों का समाधान सैन्य माध्यम के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक बयानों में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का भी उल्लेख किया है। वहीं भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद को द्विपक्षीय संबंधों में प्रमुख चिंता का विषय बताता रहा है। दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और कूटनीतिक रुख रहे हैं।

सिंधु जल संधि का भी मुद्दा उठाया

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया। पाकिस्तान का कहना है कि यह दोनों देशों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसके प्रावधानों तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।जल संसाधनों से जुड़ा यह मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अपने पहले के आधिकारिक दस्तावेजों में भी सिंधु जल समझौते और जल प्रवाह को लेकर अपनी चिंताएं दर्ज कराई हैं।

ओआईसी से पाकिस्तान ने क्या मांग की

पाकिस्तान ने ओआईसी के सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर एकजुट रुख अपनाने की अपील की। पाकिस्तान चाहता है कि ओआईसी देश कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठाते रहें।पाकिस्तान ने भारत से 5 अगस्त 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने, राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और जनसांख्यिकीय बदलावों को रोकने की मांग भी दोहराई। ओआईसी संपर्क समूह पहले भी जम्मू-कश्मीर को लेकर इसी तरह के बयान जारी करता रहा है।

भारत का रुख क्या है

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत का रुख पाकिस्तान से अलग है। भारत पहले संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 370 से संबंधित फैसले भारत के संविधान और आंतरिक शासन से जुड़े मामले हैं। भारत ने यह भी कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबित मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण और द्विपक्षीय तरीके से होना चाहिए। इसलिए संयुक्त राष्ट्र में इशाक डार के बयान को पाकिस्तान के आधिकारिक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, भारत इस मुद्दे पर अपने संवैधानिक अधिकार और द्विपक्षीय समाधान के रुख को दोहराता रहा है।

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